आज सारा भारतवर्ष शहीदों को अपने अपने अंदाज में श्रद्धांजलि दे रहा है | अब प्रश्न उठता है इनमें से कितने लोग इन्हें कल याद रखेंगे इसका उत्तर मै आप परछोड़ता हूँ |क्या आपने कभी यह सोचा जिस परिवार का कोई व्यक्ति शहीद होता है उस घर का क्या हाल होता है |
मै इस रचना के माध्यम से आपको एक शहीद के घर में लेके चलता हूँ |अगर इस रचना
को पढ़ते समय आपके आँसू निकले तो निकलने दीजिये मै यह चाहता हूँ यह रचना आंसुओं के माध्यम से आप तक पहुंचे।
बेटे के जब मौत का संदेशा घर में आया था |
तब बूढी माँ के आँखों में तो सागर उतर आया था |
कंधे पर खिलाया था जिसने अपने लाल को ,
अर्थी का तो वोझ भी उसी कंधें ने उठाया था |
अभी सुहाग कि सेज के तो फूल मुरझाये नहीं ,
और चूड़ियों के टूटने का समय वहाँ आया था |
भाई ओर बहन के करुण क्रंदन को देख कर ,
अपने किये पे तो काल भी पछताया था |