गाड़ी ने धीरे धीरे रेंगना शुरू कर दिया था जब सभी यात्री अपना सामान ठीक से रख चुके | तब शुरू हुआ औपचरिक प्रश्नों का सिलसिला जैसे आप भी यहीं चढ़े है क्या , कहाँ जायेंगे , आजकल तो टिकट मिलना मुश्किल हो गया है , कितने दिन पहले लिया | थोड़ी देर में कुछ लोगों ने आत्मीयता कि परिधि में प्रवेश करना शुरू कर दिया | आजकल दहेज़ कि मांग ज्यादा हो आगयी है | सामने बैठी लगभग साठ साल की औरत ने प्रश्न किया आपके कितने बच्चे है ?उसने कहा जी दो तुरंत ही उस औरत ने प्रश्न किया एक लड़का और एक लड़की ? उस आदमी ने कहा जी नहीं दोनों लड़की | उस औरत ने दयनीय भाव से देखा और सहानुभूति पूर्वक कहा कोई बात नहीं अगली बार लड़का होगा | यह कह कर वह उठ खड़ी हुई शायद उसका स्टेशन आने वाला था | फिर शुरू हुई एक अंतहीन बहस लड़का और लड़की के बीच , कोई कह रहा विचारधारा बदलने कि आवश्यकता है | आजकल कोई फर्क नहीं है | किसी ने अपने दो लड़की बता कर और खुश रहने कि बात कह कर विषय को विराम देना चाहा| कुछ लोग तो लड़कियों के पक्ष में बोल कर अपने को महान सिद्ध कर रहे थे |अचानक गाड़ी ने तेज आवाज कि शायद पटरी बदल रही थी तभी सामने बैठी एक औरत उम्र लगभग पेंतालिस साल , जो अब ताक शान्त थी उसने बोलना शुरू किया | क्या आप मेरे कुछ प्रश्नों का उत्तर देंगे ?
क्या आप अपनी बीस बाईस साल कि लड़की को रात में अकेले दवाई लेने भेज सकते है ?
अगर आपकी लड़की स्कूल या कालेज से दो घंटे लेट आये तो क्या चैन की नींद सो सकते है ?
बिना दहेज़ की शादी की बात आप क्या सोंच सकते है ?
जिस देश में प्रत्येक पांच मिनट में बलात्कार और प्रतिदिन बहुओं को जलाने की परंपरा बन चुकी हो वहां आप दोनों को एक कैसे मान सकते है? क्यों बार बार तुलना करते है एक दूसरे में जबकि तुलनात्मक अध्यन दो विभिन्न तत्वों का किया जाता है| दोनों को सामान बता कर आप अपनी मानसिक कमज़ोरी को छिपाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं ? एक व्यक्ति की विचारधारा बदलने से कुछ नहीं होगा बदलना है तो समाज की सोंच को बदलो |
लगातार बोलने से उसका गला रुंध गया था थोड़ा पानी पीने के वह बोली सामने की वर्थ पर मेरी बेटी है जिसका एड्मिसन कालेज में हुआ छोड़ने जा रही हूँ इसके पिता जी अस्पताल में भर्ती है मुझे तो सभी धर्म निभाने है कहीं कोई चूक हो गयी तो सब कहेंगे गैर जिम्मेदार औरत .........................
अपनी बात ख़त्म करने के बाद वह उसी मुद्रा में पढ़ने लगी |हम सभी लोग उसकी बातों पर विचार करने की मुद्रा में बैठे रहे | एक सन्नाटा छाया रहा...........................
तभी सामने बैठी एक पच्चीस छब्बीस साल की औरत ने चुप्पी तोड़ी और बोली आप लोग संतरे लेंगे क्या ? सबने ना में सिर हिला दिया |और बोली इस समस्या का हल सब अपने हिसाब से निकालते है | लगभग पांच साल पहले मेरी शादी हुई थी बहुत धूमधाम से एक अच्छी शादी का अर्थ तो आप समझ ही गए होंगे | कुछ दिन पति ने अपना आदमी का रूप दिखाना शुरू कर दिया |शराब पी कर मारा पीटी, गली गलौज एक दिनचर्या बन चुकी थी और उसे सिर झुका कर सहन करना मेरी आदत , मैंने अपनी बुजदिली को सहनशीलता का नाम दे दिया था |और एक दिन उसने तलाक के पेपर मेरे सामने रख दिए मैंने चुपचाप हस्ताक्षर कर दिए | बेटी , पत्नी , माँ और ना जाने कितने नाम के साथ एक नाम और जुड़ गया परित्यक्ता .................. उसकी बात सुनकर हम सब स्तब्ध थे और अपना मुंह छिपाने के लिए इधर उधर देख रहे थे | अब गाड़ी रुक चुकी थी मै खिड़की से बाहर देखने लगा अचानक अपनी ऑंखें बंद कर ली क्योंकि प्लेटफोर्म पर लगा भारत सरकार का महिला सशक्तिकरण का विज्ञापन मेरा मुंह चिढ़ा रहा था .................