आजकल के हालात पर एक नज़र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आजकल के हालात पर एक नज़र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, जनवरी 14, 2013

शहीदों का सम्मान

आज जब शहीदों के सम्मान की बात चल रही हैं तो मै अपनी बात चार पंक्तियों में रखना 
चाहता हूँ ।

यदि इन शहीदों का सम्मान चाहिए । 
तो एक युद्ध और  घमासान चाहिए ।
मै कश्मीर सियाचिन नहीं मांगता ,
मुझको तो पूरा पाकिस्तान चाहिए ।

रविवार, दिसंबर 30, 2012

एक पिता कि चिन्ता .....





कूद कर मेरी बेटी का 
गोद में बैठ जाना 
गलें  में बाहें डाल कर ,
कुछ माँगना
और हँसकर,मेरा उसकी ,
 मांग को पूरी करना |
मगर आज, माँगा है उसने ,
सलवार और कुर्ता,
फ्राक के बदले |
क्योंकि वह हो गयी है बड़ी|
अचानक मेरा ,
गहरी सोंच में डूब जाना   
डर कर सहम जाना |
उसे इस वहशी समाज ,
 से कैसे है बचाना ?


(पुन: प्रकाशित) 

रविवार, नवंबर 20, 2011

फिर चुनाव आने वाला है ..........

एक बार फिर चुनावों का बिगुल बज गया तरह तरह के  वादों  के साथ हमारे नेतागण
मैदान में आ गए |कोई स्विस बैंक से पैसा बापस ला रहा है तो कोई भ्रष्टाचार मिटा रहा 
है |कोई देश को एक बार फिर स्वतंत्र कराने की बात कर रहा है तो कोई गढ़े मुर्दे उखाड़  
कर, न्याय दिलाने की बात, कुल मिलकर बात ही बात ......
कभी कोई  गंगा आरती करती हैं तो कभी कोई  अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाता है ... 
कितना अच्छा लगता है यह सब  देख कर कि यहाँ सब धर्म एक सामान हैं |
हमारे नेता हर आदमी को जागरूक कर रहे हैं तुम एक आदमी ही नहीं तुम हिदू हो ,सिख
हो मुसलमान हो या ईसाई |कुछ तो इसके आगे भी समझा रहे हैं | (जो मैं लिख नहीं सकता)कहने का अर्थ यह है एक आम आदमी इनके लिए बस एक वोट बन गया हैं |



क्यों लिए फिरता है वह मजहब के  झंडे हाथ में,
क्या मालूम हो गया अपना मजहब  उसको  या  फिर चुनाव आने वाला है |

क्यों सुनाई दे रहीं मस्जिदों से घंटियाँ और मंदिरों से अजान,
या तो कोई सिरफिरा गया है उधर या फिर चुनाव आने वाला है |

यह गुजरात और गोधरा फिर क्यों सुर्ख़ियों में हैं,
या तो  अपनी गलतियों का अहसास हुआ है उन्हें  या फिर चुनाव आने वाला है |

यह आज कौन बनके हमदर्द मेरे घर आया,
या तो वह शख्स इन्सान बना है अभी या फिर चुनाव आने वाला हैं |



बुधवार, नवंबर 09, 2011

यह सब क्या है ? ( चंद शेर )



कुछ लोग मरने मारने को तैयार हुए बैठे हैं|
और कुछ लोग अपने हांथों में तलवार लिए बैठे हैं, 

ना जानें किस  फ़ितरत के मालिक हैं वह,
जो इस आग में सेंकने को हाथ तैयार लिए बैठे हैं| 

ना जानें कौन से पढ़ी है किताब उन लोगों ने,
जो दहशतगर्दी को भी एक नया नाम दिए बैठे हैं|    

कहीं शर्मसार ना हो जाये यह इंसानियत अपनी ,
हम तो हर लाश के लिए कफ़न तैयार लिए बैठे हैं| 



शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2011

जनता की मांग और उसकी चेतावनी

भ्रष्टाचार का बाज़ार आजकल  गर्म है | सभी राजनैतिक पार्टियाँ इसको मुद्दा बना कर सत्ता 
पर कब्ज़ा करना चाहते हैं |एक दुसरे को नंगा करने में सब लगे हुए हैं |यह सब तमाशा, 
बेचारी जनता को दिखा करआने वाले चुनावों में वोट पाने की यह एक तरकीब सिद्ध हो रही है| 
बेचारी जनता के  कुछ समझ में नहीं आ रहा है वह क्या करे ? और हमारे नेतागण एक 
के बाद एक खेल दिखाते जा रहें है | पता नहीं किस खेल पर जनता खुश हो जाये और  
ताली बजा दे और  उनको  वोट दे दे|क्योंकि जनता तो बहुत भोली  है ......
जनता क्या मांगती ?

तुमने क्या कमाया है यह हिसाब नहीं मांगती, 
कैसे वह कमाया है यह जबाब नहीं मांगती |
भूखी प्यासी जनता सोना चाँदी नहीं मांगती,
वह तो तन को एक कपड़ा और रोटी सुखी मांगती |

और अगर सरकार यह भी नहीं दे सकती तो उसके सरकार लिए एक चेतावनी भी यह जनता दे रही है | अगर इसको अनदेखा कर दिया तो क्या होगा .......
 जनता की चेतावनी !

जनता ही ने तो तुम्हें सिंहासन पर बिठाया है, 
एक आम आदमी से तुम्हें वी आई पी बनाया है|
जनता को जो भूलोगे तो यह तुम्हें भूल जायगी, 
सीट की तो छोडिये आपकी ज़मानत भी जायगी| 




रविवार, सितंबर 04, 2011

सियासत के बदलते रंग ..


पिछले दिनों अन्ना जी के आन्दोलन से हिली सरकार अब थोड़ा संभलने लगी हैं |
और देश के नेता भी अपने रंग में आ गए है | यानि आरोप प्रत्यारोप के रंग में या 
यूँ कहें की अपने असली रंग में बयान बदलने में तो यह कितने माहिर है | यह तो
आप  जानते ही हैं | मगर अपने इस व्यवहार से कुछ लोगों को परेशान करते हैं |
अगर आपके पास इनका जबाब हैं तो जरुर दीजियेगा ........

वक्त बदला तो रंग बदला, अब यह अपने बयान बदल रहे है|
मगर अपनी इस हरकत से गिरगिटों को परेशान कर रहे है |
सब गिरगिटों ने मिल कर मुझसे आज  एक सवाल  किया है  |
कि रंग तो तुम भी बदलते हो ,फिर हमें क्यों बदनाम किया है |   

...