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शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2011

जनता की मांग और उसकी चेतावनी

भ्रष्टाचार का बाज़ार आजकल  गर्म है | सभी राजनैतिक पार्टियाँ इसको मुद्दा बना कर सत्ता 
पर कब्ज़ा करना चाहते हैं |एक दुसरे को नंगा करने में सब लगे हुए हैं |यह सब तमाशा, 
बेचारी जनता को दिखा करआने वाले चुनावों में वोट पाने की यह एक तरकीब सिद्ध हो रही है| 
बेचारी जनता के  कुछ समझ में नहीं आ रहा है वह क्या करे ? और हमारे नेतागण एक 
के बाद एक खेल दिखाते जा रहें है | पता नहीं किस खेल पर जनता खुश हो जाये और  
ताली बजा दे और  उनको  वोट दे दे|क्योंकि जनता तो बहुत भोली  है ......
जनता क्या मांगती ?

तुमने क्या कमाया है यह हिसाब नहीं मांगती, 
कैसे वह कमाया है यह जबाब नहीं मांगती |
भूखी प्यासी जनता सोना चाँदी नहीं मांगती,
वह तो तन को एक कपड़ा और रोटी सुखी मांगती |

और अगर सरकार यह भी नहीं दे सकती तो उसके सरकार लिए एक चेतावनी भी यह जनता दे रही है | अगर इसको अनदेखा कर दिया तो क्या होगा .......
 जनता की चेतावनी !

जनता ही ने तो तुम्हें सिंहासन पर बिठाया है, 
एक आम आदमी से तुम्हें वी आई पी बनाया है|
जनता को जो भूलोगे तो यह तुम्हें भूल जायगी, 
सीट की तो छोडिये आपकी ज़मानत भी जायगी|