अपने उर के स्पंदन को,
बस जीवन मैंने मान लिया|
अपने उर के क्रंदन को
गीतों का मैंने नाम दिया|
रुके साँस के साथ कलम भी
ऐसी अपनी इच्छा हैं |
पटाक्षेप ही जीवन नाटय का,
देगा हमको इसका उत्तर|
चली है उसकी अपनी मर्जी,
या मेरी इच्छा को मान लिया|
बस जीवन मैंने मान लिया|
अपने उर के क्रंदन को
गीतों का मैंने नाम दिया|
रुके साँस के साथ कलम भी
ऐसी अपनी इच्छा हैं |
पटाक्षेप ही जीवन नाटय का,
देगा हमको इसका उत्तर|
चली है उसकी अपनी मर्जी,
या मेरी इच्छा को मान लिया|



