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गुरुवार, अप्रैल 05, 2012

ब्लोगजगत में मेरी दूसरी वर्षगांठ ....


जी हाँ आज मैंने ब्लोगिंग के दो वर्ष पूरे  कर लिए ,यह दो वर्ष कैसे बीते इसका पता ही नहीं चला । लिखना, पढ़ना और टिपियाना यही क्रम चलता रहा । कभी कभी अच्छी पंक्तियाँ, सुंदर अभिव्यक्ति ,बहुत खूब, मजेदार जैसी टिपण्णी करते करते ऊब जाता था मगर ब्लोगिंग की यह आवश्यकता हैं । 
 इसी बीच बहुत से ब्लोगर से बातचीत भी हुई जैसे जाकिर अली रजनीश ,कुंवर कुसुमेश ,
विजय कुमार सपत्ति , चंद्रमौलेश्वर प्रशाद, शिखा  दीपक  सुमन लता पाटिल , रश्मि प्रभा 
और  देवेन्द्र पाण्डेय   इन दो वर्षों में मेरी प्रोग्रेस कैसी रही यह आप रिपोर्ट कार्ड देख कर बताएं ।


कुल पोस्ट            १५१   ( एक सौ इक्यावन)   ( किसी तरह लिख दीं)
कुल अनुसरण कर्ता      २३४  ( दो सौ चौंतीस )     ( पता नहीं कैसे आये )
कुल टिप्पणी          ५०००        ( पाँच  हजार )                       ( यकीन नहीं होता )
न्यूनतम टिप्पणी                    २                दो                                     ( चलो कुछ तो मिली )
अधिकतम टिप्पणी                 ७६             छेहत्तर                               ( पता नहीं कैसे मिली )


अंत में आप सभी का आभार व्यक्त करता  हूँ । मगर यह जरुर बताएं पास या फेल ।

मंगलवार, अप्रैल 05, 2011

ब्लाग जगत में मेरी पहली वर्षगांठ



यह एक साल  यूँ बीत गया कुछ पता ही नहीं चला | एक मशीन की तरह 
सुबह पोस्ट देखना , कुछ टिपण्णी करना और  कुछ को कॉपी - पेस्ट में 
निपटा देना | ( मुझे भी तो कुछ टिपण्णी चाहिए )| इस एक साल मैंने आपके 
सामने जो भी कुछ परोसा वह  आपने एक  सभ्य अतिथि  की भांति ग्रहण किया |
 और  अच्छी लगी   , सुन्दर अभिव्यक्ति , उम्दा , दिल को छू गयी ,बहुत बढ़िया आदि 
कह कर आपने  मेरा हौसला बढाया | उसके लिए मै आपको धन्यवाद देता हूँ |
अब मेरा फर्ज  बनता है कि मै अपना रिपोर्ट कार्ड आपके सामने प्रस्तुत  करूँ |
तो यह  रहा मेरा रिपोर्ट कार्ड ........

 कुल प्रवष्टियां                                 ६५ 
 कुल अनुसरण कर्ता                      १०८ 
 कुल टिपण्णी                              १४४४  

न्यूनतम  टिपण्णी                      २   ( चलो कुछ तो मिलीं )
अधिकतम टिपण्णी                   ४७  ( अर्धशतक से चूके )


अब कुछ विशेष  ( मेरे लिए )

पहली अनुसरण  कर्ता                    Shikha Deepak
पहली टिपण्णी                             Shikha Deepak


 एक मात्र ब्लागर जिनसे मैं मिला 
    ( और किसी ने मौका ही नहीं दिया )

एक मुलाकात जाकिर अली रजनीश  से




वह तीन ब्लागर जिनसे फ़ोन पर बात हुई :

                             श्री    कुंवर कुसुमेश , विजय  माथुर, और  शिखादीपक 


बात जो दिल को छू गयी 


दीपक 'मशाल' ने कहा…आज मेरी बेटी का जन्म दिन है पर 

तकलीफ तब होती है जब सफलताओं के शिखर पर बैठी एक बेटी के लिए भी माँ-बाप कह देते हैं कि 'उसने तो बेटे की कमी पूरी कर दी' या 'वो तो बेटे से बढ़ के' या 'बेटा है मेरे लिए'.. जैसे संबोधन ही पाती है.. क्यों आखिर हमेशा तुलना बेटे से ही क्यों? क्या एक बेटी बेटी रह कर कमाल नहीं कर सकती? क्या हम उसे सिर्फ बेटी नहीं मान सकते जिसकी तुलना किसी बेटे से की जाने की जरूरत ही नहीं..
 दीपक 'मशाल' ने कहा…
ये धारणाएं भी अजीब होतीं हैं.. कोफ़्त होती है कभी-कभी खुद पर ही कि क्यों ऐसे समाज का हिस्सा हैं हम.. शिवांगी को शुभकामनाएं और आपको बधाई सर..

 वह जिन्होंने गुरु की भूमिका निभाई
राजेश उत्‍साही ने कहा…
अच्‍छी कोशिश। सुनील भाई अगर शब्‍दों के चयन और उनकी जगह पर थोड़ा सा और ध्‍यान दें तो आपकी कहन में पैनापन आ जाएगा।

उस्ताद जी ने कहा…
शोहरत की धूल पर 
2/10
साधारण
डा.सुभाष राय ने कहा…
सुनील जी आप का व्यंग्य प्रयोग अच्छा है. थोडा और तीखपन लाने की जरूरत है. जुटे रहिये. नित-नित के अभ्यास से पैनापन बढ्ता जायेगा. शुभकामनायें.

वह  जिन्होंने  मुझे सराहा 

दर्शन कौर धनोए ने कहा…
सुनील कुमार जी ,आपके ब्लोक पर पहली बार आई हु --माता -पिता की तस्वीर देखकर मेरा दिल बहुत खुश हुआ --जो इन्सान माँ -बाप की इतनी इज्जत करता हे --वो यकीनन शानदार हे --अपना फ़्लोअर(दोस्त ) बनाना चाहुगी --धन्यवाद !

उस्ताद जी ने कहा…
जीवन का गणित पर 
6.5/10

एक उत्कृष्ट और मौलिक कविता
जीवन की विडम्बना और वेदना की विलक्षण अभिव्यक्ति
कविता समाप्त होते ही पाठक के मन में अकथनीय अनुभूति होती है.

                   अंत में अगर मै इसमें सफल हुआ हूँ तो एक कहावत के अनुसार 
                               हर सफल व्यक्ति के पीछे एक स्त्री होती है |


                                       मेरी धर्मपत्नी श्रीमती दीप्ति श्रीवास्तव
                   ( क्षमा  करें केवल पत्नी, क्योंकि धर्मबहन और धर्मभाई कभी सगे नहीं होते )

अगर असफल रहा हूँ तो !


                                      मै सुनील कुमार, मेरे कर्म और मेरा भाग्य !



  एक बार फिर मै आप सबका  आभार व्यक्त करना  चाहता हूँ वह पाठक जो जानबूझ कर या गलती से मेरे ब्लाग पर आये और टिपण्णी के रूप में अपना आशीर्वाद दिया |