मंगलवार, नवंबर 20, 2012

यही सत्य हैं.....

आज बहुत दिनों के बाद ब्लॉग पर आया हूँ ।अपनी एक पुरानी  रचना ले कर , जो मेरी पसंद की हैं ।
आशा करता हूँ आपको भी पसंद आएगी ।

 यही सत्य हैं....

झाँक कर देखा खिड़की से
उमड़ते हुए बादलों को
दौड़ कर आँगन में आया | 
और आकाश में बादलों का एक झुंड पाया | 
और शुरू हो गया तलाश का,
एक अंतहीन सिलसिला
अचानक खिल उठा चेहरा |
और प्रसन्न हुआ अंतर्मन
क्योंकि मिल गयी थी मुझे ,
मुन्नी की गुड़िया और पत्नी का कंगन
फिर अचानक कुछ सोंच कर डर गया ।
यथार्थ के धरातल पर गिर गया |
दौड़ कर अन्दर आया
बंद कर ली खिड़की और दरवाजे
कहीं भिगो न दे यह,
मेरे तन का एकमात्र कपड़ा |


बुधवार, अक्टूबर 03, 2012

सन्यासी का धर्म ....

एक बार एक नदी के किनारे दो सन्यासी अपनी पूजा पाठ में लगे हुए थे । उन सन्यासी में 
से एक ने गृहस्थ जीवन के बाद सन्यास ग्रहण किया था जबकि दूसरा बाल्य अवस्था से ही
सन्यासी था। उन्होंने देखा की एक स्त्री नदी में स्नान कर रही हैं और नदी का स्तर लगातार 
बढ़ रहा हैं । उनमें से एक सन्यासी बोला अगर यह स्त्री डूबने लगेगी तो हम इसे बचा भी 
नहीं पाएंगे क्योंकि स्त्री का स्पर्श भी हमारे लिए वर्जित हैं। अचानक उन्हें बचाओ बचाओ की 
आवाज आई तब  वह सन्यासी जिसने गृहस्थ जीवन के बाद सन्यास ग्रहण किया था ।
उठ कर गया और उस स्त्री को निकाल कर किनारे ले आया और फिर अपनी पूजा पाठ में लग गया ।इस पर दूसरा सन्यासी बोला यह तुमनें अच्छा नहीं किया । स्त्री का स्पर्श भी 
हमारे लिए अपराध है । तुमने सन्यासी धर्म का उल्लंघन किया तुम्हें इसकी सजा मिलनी 
चाहिए ।तब दुसरे  संय्यासी ने  संयत  स्वर में पूछा तुम किस औरत की बात कर रहे हो ।
उसने क्रोधित हो कर कहा जिस स्त्री को तुमने अभी अभी पानी से निकाला  हैं ।इस पर पहले वाले ने उत्तर दिया उस घटना को तो बहुत समय बीत गया लेकिन तुम्हारे दिमाग में वह 
स्त्री अभी तक नही निकली मै तो उस घटना को भूल ही गया था ।यह कह कर वह फिर अपनी पूजा पाठ में लग गया .........
        

सोमवार, सितंबर 24, 2012

श्रद्धांजलि ......





                                                               श्रद्धांजलि   

नाम  : चन्द्र मौलेश्वर प्रसाद 
जन्म : 07 अप्रैल 1942
मृत्यू : 12 सितम्बर 2012 
ब्लोगिंग  सितम्बर 2007 
ब्लॉग : कलम मेरी दीवानगी पर होशवाले बहस फ़रमायें’
      हिंदी ब्लोगर फोरम इंटर नेशनल 
स्थान :    हैदराबाद 

अंतिम पोस्ट 

आदरणीय ब्लागर मित्रो,
अस्वस्थ होने के कारण शायद अंतरजाल पर  न आ  पाऊँ  ।  इसलिए कुछ समय के लिए शायद आप से भेंट न हो। स्वास्थ लाभ करके पुनः आपसे सम्पर्क स्थापित करूंगा। तब तक के लिए विदा:)



बड़े शौक से सुन रहा था ज़माना ।
 तुम ही सो गए दास्ताँ   कहते कहते ।  

  

शनिवार, सितंबर 08, 2012

असहाय भगवान् ............

एक  बार जब भगवान् शंकर धरती भ्रमण करके लौटे तो उनका मन बहुत अशांत था ।
पार्वती  ने कहा जब आप धरती लोक से बापस आते थे तो बहुत प्रसन्न होते थे मगर इस 
बार ऐसा क्या हुआ कि आपका मन अशांत हैं । भगवान् शंकर ने कहा तुम तो जानती हो 
की मैं धरती पर लोगों को सुखी देखना चाहता हूँ लोगों का दुःख पूछता हूँ उनका निवारण 
करता हूँ । और उनको सुखी करके बापस आ जाता हूँ । मगर इस बार मैं अपने को बहुत 
असहाय अनुभव कर रहा हूँ । इस बार  एक व्यक्ति के दुःख को मैं दूर नहीं कर सका । 
क्योंकि उसका दुःख था कि  मेरा पड़ोसी सुखी क्यों हैं .............

मंगलवार, सितंबर 04, 2012

कैसे कैसे लोग........

टैक्सी ड्राईवर ने स्टेशन के सामने जाकर गाड़ी पार्क कर दी । साहब ने गाड़ी का मीटर देखा 
और ड्राईवर पर चिल्लाने लगे तुम लोग हेरा फेरी करे बिना नहीं मानते इतना मीटर कैसे 
आ सकता हैं । ड्राईवर ने मुस्करा कर कहा सर आप मीटर की जाँच करवा सकते हैं हम गरीब जरुर हैं मगर चोर नहीं । चलिए आप दस रुपये कम दे दीजिये । साहब ने जल्दी से 
अपना सामान निकाला और प्लेटफ़ॉर्म की तरफ चल दिए|थोड़ी देर बाद ड्राईवर ने देखा कि 
मेमसाहब का पर्स पीछे की सीट पर पड़ा हैं वह तुरंत उसे लेकर उनके पीछे भागा मगर तब 
तक वह लोग बहुत आगे निकल चुके थे । वह चिंता में था कैसे उनका पर्स उन तक पहुंचे। 
रास्ते  की बातों से उसे इतना तो मालूम पड़ गया था वह लोग मुंबई जा रहे हैं ।मगर कौन 
सी ट्रेन कौन सा कोच यह कुछ भी नहीं पता था ।  प्लेटफोर्म पर पहुँच  कर वह एक एक डिब्बे में झांक झांक कर उन्हें खोजने लगा । आखिर उसने उनको एक एसी कोच में ढूंढ़    
लिया ।पास जाकर बोला " आपका पर्स गाड़ी में रह गया था"। साहब ने खुश हो कर अंग्रेजों 
से उधार लिए दो शब्द उसकी तरफ उछाल दिए" थैंक्स थैंक्स" ।जब वह बहां से जाने लगा 
तो मेमसाब बोली  उसको  रोको पहले देख तो लें कुछ गायब तो नहीं हैं ?  

  

बुधवार, अगस्त 29, 2012

आधा कम्बल.......


किसी गाँव में एक व्यक्ति अपने पत्नी और  अपने इकलौते  बेटे के साथ रहा करता था ।
अचानक एक दुर्घटना में उसकी पत्नी की मृत्यू  हो गयी । कुछ दिन गुजरने के पश्चात् उसने 
सोंचा घर सँभालने के लिए एक  स्त्री  की आवश्यकता होती हैं क्यों ना अपने बेटे की शादी
करदी जाये ।अत: उसने अच्छा सा रिश्ता देख कर उसका विवाह कर दिया । इस बीच उसके घर एक बेटे का जन्म भी हो गया ।अब वह दिन भर अपने पोते के साथ खेलता रहता और 
घर बाहर  का काम  भी कर दिया करता इस तरह उसके दिन अच्छे गुजरने लगे ।
एक दिन अचानक उसके बेटे ने  कहा देखिये पिता जी आप तो जानते ही हैं कि घर का 
खर्चा कितना बढ़ गया हैं और आप के लगातार बीमार रहने से इलाज भी कराना  पड़ता हैं ।
आप दिन भर खांसते रहते हैं अगर यह छुआछूत का रोग मेरे बेटे को लग गया तो हम एक 
बड़ी मुश्किल में पड़ जायेंगे क्यों ना आप घर छोड़ कर किसी बृद्ध  आश्रम में चले जाएँ तो 
यह हम सब के लिए अच्छा होगा । पिता ने उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और जाते समय बोला मुझे ओढ़ने के कुछ दे दो बाहर बहुत ठण्ड हैं ।बेटे ने पुराना कम्बल निकाल कर 
दे दिया। उसने उस कम्बल के दो हिस्से करे और अपने बेटे से बोला इसे संभाल कर रखना 
यह आधा कम्बल कुछ समय बाद तुम्हारे काम आएगा ....... 

   

शुक्रवार, अगस्त 17, 2012

हिंग्लिश बाल कविता

बरसात के दिनों में एक अध्यापक ने विद्यार्थी से स्कूल  ना आने का कारण पूछा तब उसने कुछ इस तरह से बताया ....





इट वाज रैनिंग झमाझम । 
रोड पर आते थे जब हम ।  
लेग माई फिसलिंग गिर पड़े हम ।
इसी वजह से कुड  नॉट कम । 


सोमवार, अगस्त 13, 2012

यह भी एक बेटी है ......






बेटी बचाओ 

बेटे और बेटी में ,
भेद मत कीजिये |
बेटियों को जीने का
अधिकार आप दीजिये |
इंदिरा और कल्पना की,
उड़ान तुमने देखी है |
अब अपनी सायना की
शान अब देखिये |
एक दिन नाम यह
तुम्हारा कर जाएँगी
बस एक बेटी घर में
पाल के तो देखिये

(आज एक पूर्व प्रकाशित रचना) 

रविवार, अगस्त 05, 2012

मित्र की एक परिभाषा.........


मित्रता दिवस पर मित्र की एक  परिभाषा 

F     FELLOW ( WHO)
R    READY 
I      IN 
E    EVERY 
N    NEED (AND) 
D    DEED


मित्रता दिवस की हार्दिक बधाई 


शुक्रवार, अगस्त 03, 2012

मतला और एक शेर,.......



जब दवा बेअसर हो जाती है तब दुआओं का असर होता हैं |
सताना गरीब को छोड़ो , बददुआओं  का भी असर होता हैं| 

और ग़र आ रही हो, ज़िल्लत की महक किसी रोटी से ,
मत भूलो मेरे दोस्त उसका एक निबाला भी ज़हर होता हैं ।