अक्सर हास्य कवियों पर यह आरोप लगते है कि वह लतीफों को पंक्तिबद्ध
करके रचनाएँ लिखते है | मगर मेरा मानना है कि हास्य कवि दोहरी भूमिका
निभाता है | इस व्यथित समाज को हँसाने के साथ साथ सन्देश भी देता है |
चलिए एक आरोप और लगा दीजिये |
एक विचार आया |
और तुरंत ही उसने ,
एक विज्ञापन छपवाया |
हमारा अगला अंक ,
सत्य कथा विशेषांक होगा |
और घटनाओं की सत्यता ,
चयन का आधार होगा |
तब हो गया एक चमत्कार ,
रचना आयीं पूरी पचास हज़ार |
मगर एक ही शीर्षक,
आ रहा था बार बार
नेताओं का भ्रष्टाचार , नेताओं का भ्रष्टाचार