लीजिये हम भी शामिल हो गए दो सौ फालोअर के ब्लोगरों की जमात में ( इसमें मेरा कोई योग्यदान नहीं है )अब मेरा नैतिक कर्तव्य होता है कि मै आप सभी का आभार व्यक्त करूँ ,धन्यवाद दूँ और प्राथर्ना करूँ किअब मुझे छोड़ कर मत जाना ( बड़ी बदनामी होती है ) छोडिये इन बातों को , यह आवश्यक औपचारिकता के अंतर्गत आतीं हैं |
लगभग बीस महीने कि ब्लोगिंग में मेरा जो अनुभव रहा वह शेरों में कहने कि कोशिश कर रहा हूँ |यह बदलते मिज़ाज की ग़ज़ल हैं |
दिल में जो भी आये वह ब्लॉग में लिख दीजिये ,
क्यों बेवजह दिल में बातों का एक ज़खीरा बनाया जाये |
छिपे हैं दर्द, जो मेरे दिल के किसी कोने में,
चलो एक पोस्ट के जरिये, उन्हें अब सामने लाया जाये |
वह पौधा , जो कल एक दरख़्त की शक्ल पा जायेगा |
आओ उसमें कुछ मशविरे की खाद और हौसले का पानी लगाया जाये |
ग़र फ़ुरसत मिल गयी हो किसी नामचीं शायर को दाद देने से ,
चलो अब कुछ नौजवानों को भी हौसला बढ़ाया जाये |
आओ चलो दो चार नए ब्लोगों को टिपिया जाये |
और अपने लिए एक नया फालोअर भी कहीं से लाया जाये |
किसी की टांग का खींचना यहाँ खेल अगर ब्लोगिंग है|
तो फिर क्यूँ ना यह खेल, ओलम्पिक में भी खिलवाया जाये |