शनिवार, जुलाई 09, 2011

लगेगी उम्र तुम्हें हमको भूल जाने में .............चंद शेर



नहीं मिलेगा  कोई  मुझसा तुम्हें ज़माने में, 
लगेगी  एक उम्र  तुम्हें, हमको भूल जाने में|

है रूठना, तो तुम रूठो मगर यह याद रखो, 
कहीं गुजर ना जाये यह रात बस  मनाने में|

चलो आँधियों  से कहें  कि रास्ता बदलो,
लगी है उम्र  हमें  बस  एक घर बनाने में|


यह कौन मेरे दर पे देके दस्तक चला गया ,
उसे  कुछ और, लगेगा वक्त मुझको  भुलाने में|   

31 टिप्‍पणियां:

  1. भैय्या, ज़रा केयरफ़ुल रहना
    कहीं बात न पहुंच जाए ज़नाने में :)

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  2. चलो आंधियों से कहें की रास्ता बदलो,
    लगी है उम्र हमें एक घर बनाने में।

    वशीर साहब कहते हैं

    लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में
    तुम तरस नहीं खाते, बस्तियां जलाने में।

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  3. गज़ब के शेर गज़ब की गज़ल्………बधाई।

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  4. ला-जवाब" जबर्दस्त!!गज़ब के शेर
    ...... बहुत खूब .......

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  5.  अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  6. वो जायेंगे भूल, मगर, भूली हुई सामान की रपट
    लिखने आप न चले जाएँ थाने में
    __________
    वन्स मोर !

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  7. सुन्दर भावाभिव्यक्ति ||
    बधाई ||

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  8. यह कौन मेरे दर पे देके दस्तक चला गया ,
    उसे कुछ और, लगेगा वक्त मुझको भुलाने में|

    वाह ..बहुत खूबसूरत गज़ल ...

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  9. चलो आंधियों से कहें की रास्ता बदलो,
    लगी है उम्र हमें एक घर बनाने में।

    वाह..बहुत खूबसूरत........

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  10. सुनील भाई, दिल से निकली हुईबात। बधाई।

    ------
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  11. है रूठना तो तुम रूठो मगर यह याद रखो,
    कहीं गुजर ना जाये यह रात बस मनाने में।

    बहुत अच्छी ग़ज़ल।

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  12. क्या बात करते हैं सुनील बाबू!
    तुमको न भूल पाएंगे!!

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  13. हर शेर लाजवाब ... उम्दा ... गज़ब ...

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  14. दिल की बातें दिल से लिखी है ...

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  15. लाज़वाब गज़ल..हरेक शेर बहुत उम्दा और दिल को छू जाता है..

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  16. वाह ! दिल से निकले चंद बहुत उम्दा अशयार !

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  17. चलो आंधियों से कहें की रास्ता बदलो
    लगी है उम्र हमें एक घर बनाने में
    लाजवाब प्रस्‍तुति
    ,
    हर शेर दमदार।
    शुभकामनाएं आपको..........

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  18. है रूठना तो तुम रूठो मगर यह याद रखो,
    कहीं गुजर ना जाये umr बस मनाने में।
    behatrin

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  19. सुनील जी,
    हमें लगा है काफी वक़्त आपकी ग़ज़ल से बाहर आने में
    क्या पता ऐसे कितने और शेर हैं आपके गज़लखाने में...
    बधाई हो!!!!

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  20. उम्दा, आँधियों से कहना ही पड़ेगा।

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  21. चारों शेर एक से बढ़ कर एक है, भावाभिव्यक्ति मे दमदार हैं.

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