सोमवार, नवंबर 28, 2011

मतला और एक शेर............

साज़िशें हवाओं ने कुछ
मेरे साथ  इस तरह कीं|
दिल सुलगता देखकर, 
रुख अपना हमारी ओर कर दिया |  


मेरी मुहब्बत का सिला ,
मेरे महबूब ने इस तरह दिया |
बुला कर बज़्म में अपनी, 
मुझको बेगाना कह दिया | 

36 टिप्‍पणियां:

  1. वाह क्या बात शेर कहा है आपने सर. बधाई हो.

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  2. साज़िशें हवाओं ने कुछ
    मेरे साथ इस तरह कीं|
    दिल सुलगता देखकर,
    रुख अपना हमारी ओर कर दिया | ...waah

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  3. बेगाना कह दिया तो क्या दुगाना चलता रहे... बस!:) अच्छे अश’आर के लिए बधाई सुनिल भाई।

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  4. वाह !!! बहुत ही बढ़िया शानदार प्रस्तुति ....

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  5. साज़िशें हवाओं ने कुछ
    मेरे साथ इस तरह कीं|
    दिल सुलगता देखकर,
    रुख अपना हमारी ओर कर दिया |

    बहुत सुन्दर

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!यदि किसी ब्लॉग की कोई पोस्ट चर्चा मे ली गई होती है तो ब्लॉगव्यवस्थापक का यह नैतिक कर्तव्य होता है कि वह उसकी सूचना सम्बन्धित ब्लॉग के स्वामी को दे दें!
    अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  7. क्या बात है सुनील जी. दोनों शे'र बहुत खूब कहे हैं.

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  8. बहुत खूब लिखा है आपने! दोनों शेर लाजवाब लगा!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  9. मेरी मुहब्बत का सिला ,
    मेरे महबूब ने इस तरह दिया |
    बुला कर बज़्म में अपनी,
    मुझको बेगाना कह दिया |....बेहद शानदार

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  10. वाह वाह ! गागर में सागर

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  11. वाह - सुन्दर मोती ---- ढेरों शुभ कामनाये,

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  12. बहुत सुन्दर और बेहतरीन शेर......बधाई

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  13. अच्छा प्रयोग बढ़िया रचना !

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  14. बहुत ही मनभावन प्रस्तुति । कामना है सर्वदा सृजनरत रहें । मेरे नए पोस्ट पर आपकी आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । धन्यवाद ।

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  15. मेरी मुहब्बत का सिला ,
    मेरे महबूब ने इस तरह दिया |
    बुला कर बज़्म में अपनी,
    मुझको बेगाना कह दिया |
    यही रवायत है दुनिया की दिल जलों से पूछ देखो .बेहरसूरत दोनों शैर खूबसूरत हैं .

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  16. साज़िशें हवाओं ने कुछ
    मेरे साथ इस तरह कीं|
    दिल सुलगता देखकर,
    रुख अपना हमारी ओर कर दिया |

    ......... dono bahut umda . sher .........kam shabdo me hawa ki rawani bayan kar gaye . badhai .

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  17. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

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  18. समय ख़राब चल रहा है। ज़रा संभलकर।

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  19. सुनील जी
    क्या कहे
    आपके दोनों शेरो ने गज़ब ढाया है ..
    सीधे दिल पर पहुंचे है तीर !!

    बधाई !!
    आभार
    विजय
    -----------
    कृपया मेरी नयी कविता " कल,आज और कल " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/11/blog-post_30.html

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  20. वाह ... दोनों शेर कमाल हैं ... सुब्गान अल्ला इस अदायगी पर ...

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