मंगलवार, नवंबर 22, 2011

कुछ अजीब से हालात है ..........



तुम छिप छिप कर अब  मुझसे मिलने आना,
अब हर रस्ते पर कुछ आँखें पहरा देती हैं |

आना , मिलना पर कुछ ना कहना तुम मुझसे,
अब तो दीवारें भी  हरदम  चौकन्नीं   रहती हैं |

तुमने कब ,क्या बोला अब कुछ भी याद नहीं ,
अब बस अनकही बात ही मेरे जहन में रहती है |

कसमें -वादे, प्यार की बातें  यह , दिल की मज़बूरी है ,
माना यह सब सच हों, पर मुझको झूठी लगती हैं |


(चित्र गूगल के सौंजन्य से )

33 टिप्‍पणियां:

  1. तुम छिप छिप कर अब मुझसे मिलने आना,
    अब हर रस्ते पर कुछ आँखें पहरा देती हैं |

    आना , मिलना पर कुछ ना कहना तुम मुझसे,
    अब तो दीवारें भी हरदम चौकन्नीं रहती हैं |
    Bahut khoob! Bahut hee achhee rachana!

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  2. आना , मिलना पर कुछ ना कहना तुम मुझसे,
    अब तो दीवारें भी हरदम चौकन्नीं रहती हैं |
    bahut khoobsurti se likhe hain.....

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  3. कसमे वादे प्यार की बातें यह दिल की मजबूरी है
    माना यह सब सच हो पर मुझको झूठी लगती है
    सुंदर प्रस्तुति,..पसंद आई...

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  4. प्रेम करने वाले चौकन्ने होते हैं लेकिन दुनिया की आँखें कई गुणा चौकन्नी होती हैं. सच की अभिव्यक्ति सब से बड़ी जीत होती है.

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  5. क्‍या बोला अब कुछ भी याद नहीं.....शायद अबोला ज्‍यादा प्रभावी होता है। खूबसूरत...

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  6. बहुत खूब कहा, प्यार पर बड़े पहरे हैं।

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  7. kabhi ghar me uske gaya nahi kabhi bat us se kiya nahi me janam janam se usi ka hoo use aaj tak ye pata nahi..............aapki rachna bahut sunderta se likhi gayi hai badhai aapko.apne mujhe sujhav diya tha word verification hatane ka jo mujhe nahi aaya pls maar darshan kare

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  8. आना , मिलना पर कुछ ना कहना तुम मुझसे,
    अब तो दीवारें भी हरदम चौकन्नीं रहती हैं |
    क्या बात कही है ..बहुत बढ़िया.

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  9. आना , मिलना पर कुछ ना कहना तुम मुझसे,
    अब तो दीवारें भी हरदम चौकन्नीं रहती हैं |

    very nice........

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  10. झूठ जो आपको लगती है , को खूबसूरती से लिखा है आपने.अच्छी लगी.

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  11. तुमने कब ,क्या बोला अब कुछ भी याद नहीं ,
    अब बस अनकही बात ही मेरे जहन में रहती है |
    सुन्दर सी पंक्तिया...

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  12. अनूठे भाव और दिल को छूती हुई गजल !

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  13. बहुत ही अच्छे भावों को शब्दबद्ध किया है आपने !

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  14. तुमने कब ,क्या बोला अब कुछ भी याद नहीं ,
    अब बस अनकही बात ही मेरे जहन में रहती है |

    खूबसूरत शेर ..बधाई

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  15. बहुत सुन्दर भाव संजोये हैं।

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  16. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||

    बधाई महोदय ||

    dcgpthravikar.blogspot.com

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  17. वाह ! क्या खूब शेर लिखे हैं .....

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  18. तुमने कब ,क्या बोला अब कुछ भी याद नहीं ,
    अब बस अनकही बात ही मेरे जहन में रहती है |

    दिल की बात उतर आई शब्दों में ....!

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  19. कसमें -वादे, प्यार की बातें यह , दिल की मज़बूरी है ,
    माना यह सब सच हों, पर मुझको झूठी लगती हैं |
    बहुत खूब सुनील जी ... बार बार ये बातें होँ तो जूठी ही लगती हैं ... लाजवाब शेर हैं सरे ..

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  20. बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने...आभार

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  21. हैं तो झूठ, लेकिन इतना ख़ूबसूरत की झूठ है ऐसा मन नहीं मानता!!

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  22. कसमें -वादे, प्यार की बातें यह , दिल की मज़बूरी है ,
    माना यह सब सच हों, पर मुझको झूठी लगती हैं |

    ....बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...लाज़वाब शेर ...

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  23. तुम छिप छिप कर अब मुझसे मिलने आना,
    अब हर रस्ते पर कुछ आँखें पहरा देती हैं |

    आना , मिलना पर कुछ ना कहना तुम मुझसे,
    अब तो दीवारें भी हरदम चौकन्नीं रहती हैं |

    बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने.

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  24. waah bahut khub..


    हर इशारे में उसकी मोहब्बत की इबादत का रंग नज़र आता है
    आ कर वो मेरे कानो में धीमे से एक गीत गुनगुनाता है(anu)

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  25. तुम छिप छिप कर अब मुझसे मिलने आना,
    अब हर रस्ते पर कुछ आँखें पहरा देती हैं |

    आना , मिलना पर कुछ ना कहना तुम मुझसे,
    अब तो दीवारें भी हरदम चौकन्नीं रहती हैं |
    bahut hi pyarbhari rachana hai....

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