गुरुवार, सितंबर 01, 2011

किसका मकान ?



चौराहे से निकली ,
एक गली |
उसी गली का 
आखिरी मकान,
किसका मकान ?
लोगों का प्रश्न 
क्यों खुले हैं दरवाजे 
और बंद है खिड़कियाँ 
मकान का उत्तर 
खुले दरवाजे ,
तुम्हारी इज्ज़त पर ,
आंच नहीं आने देते |
और बंद खिड़कियाँ 
तुम्हारे नंगेपन को ,
दिखने नहीं देतीं |


37 टिप्‍पणियां:

  1. खुले दरवाज़े ने और बंद खिड़कियों ने गहरी बात कह दी

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  2. अंत:करण से निकली बहुत गहरी अभिव्यक्ति....

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  3. विचारणीय और सार्थक रचना .......गणेश चतुर्थी की बधाई

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  4. बेहतरीन शब्दो मे गहन भावो को उकेरा है…………शानदार प्रस्तुति।

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  5. gahre ehsaas hain.... anurodh hai ki aap rachnaaon ko khol den taki main suvidhanusaar rachnayen kabhi bhi le sakun

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  6. वाह बहुत ही बदिया और गहरी बात कहदी सुनीलजी आपने /बहुत बेमिसाल रचना /बधाई आपको /

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  7. दरवाजे और खिडकियों का जवाब .....कविता का चरम

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  8. कल 2/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  9. बहुत गहन और दिल को छूने वाली अभिव्यक्ति...लाज़वाब

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  10. ईद की सिवैन्याँ, तीज का प्रसाद |
    गजानन चतुर्थी, हमारी फ़रियाद ||
    आइये, घूम जाइए ||

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  11. हृदय के खुले किवाड़ और लज्जा की बंद खिड़की व्यक्तित्व को मानवीय बना देती है. सुंदर कविता. वाह.

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  12. बड़ी बारीकी से व्याख्यायित किया है आपने।

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  13. सुनील जी इस बार तो हिला के रख दिया
    सोच रहा हूँ और समझने की कोशिश कर रहा हूँ
    गहरी अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत की गई उत्तम कविता

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  14. अच्छे बिम्ब उठाए हैं खिड़की दरवाजों के माफिक .विचार सौन्दर्य भाव सौन्दर्य में दूध पानी सा रिलमिल गया है .यथार्थ परक कविता जीवन की अन्दर ई बात बताती .

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  15. भावमय करते शब्‍दों के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  17. गहरे भाव लिए बेहतरीन प्रस्‍तुति।
    यथार्थवादी चित्रण.................

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  18. गहरे भाव के साथ बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने ! बेहतरीन प्रस्तुती !
    आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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  19. क्या आप कुछ कहना चाहेंगे इस कविता को लिखते समय क्या भाव थे आप क्या कहना चाह रहे थे.. कठिन कविता लगी मुझे...

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  20. खुले हैं दरवाजे
    और बंद है खिड़कियाँ
    दरवाजों का खुला होना मन के खुलेपन का प्रतीक और बंद खिड़कियाँ एक सीमांकन है निजता को सुरक्षित रखने का ....बहुत बढ़िया

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  21. आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली(७) के मंच पर प्रस्तुत की गई है/आपका मंच पर स्वागत है ,आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें ,यही कामना है / आप हिंदी ब्लोगर्स मीट वीकलीके मंच पर सादर आमंत्रित हैं /आभार/

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  22. खिडकी और दरवाजे के माध्यम से गहरी बात कह दी सुनील जी ...

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  23. ये बंद गली का आखरी मकान सही कह रहा है । बेहतरीन रचना ।

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