शनिवार, सितंबर 10, 2011

एक नई सुबह......






कोहरे की बिछी चादर
 अब सिमटने लगी है |
क्योंकि सूरज की किरणें , 
अब विखरने लगी है |
मुंदी हुई अपनी
आँखों को खोलो ,
और खोजो ,
अपना गंतव्य
क्योंकि दे रही है
दस्तक
एक नई सुबह...



( एक बार फिर से एक पुरानी रचना )


(चित्र गूगल के सौंजन्य से) 

34 टिप्‍पणियां:

  1. सुनील जी कविताये कभी पुराणी नहीं होती, विषय पुराने हो सकते है , कविता में आपकी वही ताजगी है बधाई

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  2. सुनील जी !!

    बहुत बढ़िया ||

    साधना में लगे रहो ||

    बधाई ||

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  3. सुबह की प्रतीक्षा है, हर रात को।

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  4. पुरानी रचना है पर आज भी वही ताजगी है रचना में

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  5. बहुत संक्षिप्त मगर अच्छी.

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  6. कोहरे की बिछी चादर अब सिमटने लगी है
    क्योंकि सूरज की किरणें, अब विखरने लगी है ...

    बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति...

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  7. आशा की किरण जगाती हैं आपकी यह पंक्तियां ... आभार

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  8. क्योंकि दे रही है
    दस्तक
    एक नई सुबह...umeedo ke sath.... very nice panktiya...

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  9. कोहरे की बिछी चादर
    अब सिमटने लगी है |
    क्योंकि सूरज की किरणें ,
    अब विखरने लगी है |
    मुंदी हुई अपनी
    आँखों को खोलो ,
    और खोजो ,
    अपना गंतव्य
    क्योंकि दे रही है
    दस्तक
    एक नई सुबह...आशावाद के पंख खोलती ,आश्वश्त करती कल को रचना .

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  10. आज भी वही ताजगी है इस पुरानी रचना में .....

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  11. एक नयी सुबह हमेशा साथ लाती है नयी उम्मीद एवं आशायें
    बहुत अच्छी रचना।मेरे ब्लाँग पर आने और सुझाव देने के लिये
    धन्यवाद सुनिल जी। मेरी कविता तुम्हारी बारी जो मई में लिखी है
    उसे अवश्य पढिये आपको अच्छी लगेगी।

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  12. आशा का संदेसा देती एक सुंदर रचना
    शुभकामनायें

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  13. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  14. कल 12/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  15. अच्छी रचना ही पुनर्प्रस्तुत हो सकती है.बेशक बहुत ही उम्दा रचना है.

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  16. बहुत सुन्दर..अति सुन्दर सन्देश ....

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  17. बहुत अच्छी रचना है| पुरानी है तो क्या
    आशा

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  18. गंतव्य - वही तो ढूंढ रहे हैं सभी - हाहाहाह

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  19. हकीकत बयान करती यह पोस्ट अच्छी लगी...शुभकामनायें !!

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  20. बहुत ही उम्दा रचना है......सुन्दर....

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  21. मुंदी हुई अपनी
    आँखों को खोलो ,
    और खोजो ,
    अपना गंतव्य
    prenarthak prastuti ke lie aapka abhar.

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