गुरुवार, सितंबर 15, 2011

मेरा ख़त .........चंद शेर


इस ख़त में कुछ लफ्ज़   ,
खून ए ज़िगर से भी लिखे हैं |
नुक्ते की जगह मैंने , 
आँख का मोती लगा के रखा है

वह लफ्ज़ जिन्हें तेरे ख़त में 
मैं शामिल ना कर सका 
  उनको मैंने बस तेरी , 
ग़ज़ल के लिए बचा कर रखा हैं |

  

38 टिप्‍पणियां:

  1. नुक्ते की जगह मैंने ,
    आँख का मोती लगा के रखा है

    वाह , वाह , बहुत खूब शे'र कहा है ।
    बस लब्ज़ की जगह लफ्ज़ कर लें ।

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  2. Sunil ji
    sundar rachna ke liye badhai sweekaren.
    मेरी १०० वीं पोस्ट , पर आप सादर आमंत्रित हैं

    **************

    ब्लॉग पर यह मेरी १००वीं प्रविष्टि है / अच्छा या बुरा , पहला शतक ! आपकी टिप्पणियों ने मेरा लगातार मार्गदर्शन तथा उत्साहवर्धन किया है /अपनी अब तक की " काव्य यात्रा " पर आपसे बेबाक प्रतिक्रिया की अपेक्षा करता हूँ / यदि मेरे प्रयास में कोई त्रुटियाँ हैं,तो उनसे भी अवश्य अवगत कराएं , आपका हर फैसला शिरोधार्य होगा . साभार - एस . एन . शुक्ल

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  3. बहुत सुन्दर शेर...वाह ...ऊपर वाला तो बहुत जोरदार है ...

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  4. बेहद प्रवाभशाली अभिव्यक्ति ! बधाई स्वीकारें!

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  5. देखी रचना ताज़ी ताज़ी --
    भूल गया मैं कविताबाजी |

    चर्चा मंच बढाए हिम्मत-- -
    और जिता दे हारी बाजी |

    लेखक-कवि पाठक आलोचक
    आ जाओ अब राजी-राजी |

    क्षमा करें टिपियायें आकर
    छोड़-छाड़ अपनी नाराजी ||
    FRIDAY
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. इस ख़त में कुछ लफ्ज़ ,
    खून ए ज़िगर से भी लिखे हैं |
    नुक्ते की जगह मैंने ,
    आँख का मोती लगा के रखा है
    बहुत ही खूबसूरत शेर /दिल को छु लेने वाली रचना /बहुत बधाई आपको /
    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है /जरुर आइये/
    www.prernaargal.blogspot.com

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  7. बेहद प्रवाभशाली और सुन्दर कविता

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  8. वह लफ्ज़ जिन्हें तेरे ख़त में
    मैं शामिल ना कर सका
    उनको मैंने बस तेरी ,
    ग़ज़ल के लिए बचा कर रखा है....
    लफ्ज़ इतने ख़ूबसूरत हैं तो ग़ज़ल कैसी होगी....... बहुत सुन्दर रचना

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  9. बहुत खुबसूरत रचना ..........बहुत खूब

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  10. मुझ से मत पूछ मेरे इश्क में क्या रखा है
    एक शोला है जो सीने से लगा रखा है ॥

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  11. नुक्ते की जगह मैंने ,
    आँख का मोती लगा के रखा है

    -वाह, क्या बात है!! बेहतरीन!!

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  12. इस ख़त में कुछ लफ्ज़ ,
    खून ए ज़िगर से भी लिखे हैं |
    नुक्ते की जगह मैंने ,
    आँख का मोती लगा के रखा है

    वाह...... बेहतरीन

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  13. wow ....... very lovey .. sundar alfaj ke saath bahut kuch kah gayi.. :)

    sapne-shashi.blogspot.com

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  14. बहुत गहन भावों का सम्प्रेषण, जो शब्द बचा कर रखे हैं ...उनसे तो समय - समय पर बेहतर ग़ज़ल तो निकला ही करेगी न ....!

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  15. गर बचा कर न रखते ,
    और ख़त में ही लिखते
    मैं क्यूँ इतना रोती,
    तुम अपने से लगते।

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  16. वाह ! वाह ! बहुत उम्दा रचना !

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  17. बेहद प्रवाभशाली और खुबसूरत रचना ....

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  18. बहुत गहराईयों से निकली हुई है ये पंक्तियाँ ....

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  19. बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !

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  20. नुक्ते ही नुक्ते मिले लफ्ज मिला नहीं एक.
    मोती चुन-चुन रख लिए,कागज दिया है फेंक.
    बिना लफ्ज का खत मानो,बिन दस्तखत का चेक
    जल्दी से फिर खत लिखो , रस्ता रहे हैं देख.

    आपके सुंदर भावों ने मन मोह लिया.

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  21. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति !बहुत खूब बहुत सुन्दर

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  22. इस ख़त में कुछ लफ्ज़ ,
    खून ए ज़िगर से भी लिखे हैं |
    नुक्ते की जगह मैंने ,
    आँख का मोती लगा के रखा है
    बहुत खूब सुनील भाई .दोनों शैर काबिले दाद !शुक्रिया ज़नाब का .

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  23. वाह क्या बात है नुक्ते की जगह आँखों के मोती ... क्या कल्पना है सुनील जी ...

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  24. बहुत खूब ...सुन्‍दर शब्‍द और कोमल भावनाएं....सुन्दर रचना !

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  25. दिल अपनी भावनाओं को आँख के मोती
    से ही प्रदर्षित करता है।अच्छी अभिव्यक्ति।

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  26. बहुत बढ़िया .... सशक्त ,गहन अभिव्यक्ति

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  27. वाह वाह....

    क्‍या बात है...

    बेहतरीन रचना।

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