रविवार, जून 12, 2011

मेरी किस्मत में वह क्यों था ?


आज फिर एक पुरानी रचना जो मुझे  अच्छी लगती है  अब क्या  ख्याल है आपका !

आसमान में लाखों तारे
पर एक ही तारा मुझको भाया |
और टूटा वह, एक ही तारा ,
जो मेरी किस्मत में आया | 
चलो मान ही लेता हूँ मै ,
यह मेरी किस्मत में लिखा हुआ था |
मगर फिर क्या दोष था उसका , 
जो आसमान में में सजा हुआ था |
हम दोनों की एक ही किस्मत
हम दोनों की एक सी बातें |
साथ में अपने रहते लाखों
फिर भी अकेले हम कहलाते |
एक विविधता हम दोनों की
जो आज मेरी समझ में आयी |
उसका अपनों से सच्चा रिश्ता
और मेरा अपनों से मिथ्या नाता ,
तभी तो उसका जीवन एक कथा है
और मेरा जीवन एक व्यथा है |

32 टिप्‍पणियां:

  1. vividhta jab samajh mein aai to use suljhana zaruri hai...bahut kuch vyakt kerti rachna

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  2. सुंदर रचना ...विचारों की गहन अभिव्यक्ति!

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  3. जो मिले, उसे स्वीकार कर आगे बढ़ सकें।

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  4. हद है जी किस्मत की,
    तारा भी कौन सा टूटा जो हमें पसंद आया था।

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  5. Accha lagta hai aapko padhna.Badhiya likh rahe hoaap.meri hardik shubh kamnayen.
    sasneh
    dr.bhoopendra
    mp

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  6. खजाने से उम्दा चीज निकाली है ढूंड कर. दिल को छूती मन की अभिव्यक्ति एक दम मासूम सी. बधाई.

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  7. सुंदर अभिव्यक्ति है सुनील जी

    आभार

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  8. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! बधाई!

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  9. हाए गजब कहीं टूटा तारा,
    टूटा भी वही जो हमें था प्यारा..

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  10. विचार कहाँ से कहाँ तक जाते हैं ... सुंदर रचना है ...

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  11. जो तारा टूटा ...बस वही अपना नहीं होता
    दिल की सोच को शब्द दे दिए आपने ..बहुत खूब

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  12. जो तारा टूटा उससे आपने कब पूछा कि तेरा रिश्ता सच्चा था और यह कब जाना कि मेरा मिथ्या है, जो भी दिखता है सब ही तो मिथ्या है सत्य छिपा ही रहता है...

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  13. सुन्दर भाव और गहन अभिव्यक्ति......

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  14. जीवन केवल इतना ही नहीं है। वह इन रिश्तों से बहुत आगे जाता है।

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  15. लीगल सैल से मिले वकील की मैंने अपनी शिकायत उच्चस्तर के अधिकारीयों के पास भेज तो दी हैं. अब बस देखना हैं कि-वो खुद कितने बड़े ईमानदार है और अब मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर ही एक प्रश्नचिन्ह है

    मैंने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर श्री बी.के. गुप्ता जी को एक पत्र कल ही लिखकर भेजा है कि-दोषी को सजा हो और निर्दोष शोषित न हो. दिल्ली पुलिस विभाग में फैली अव्यवस्था मैं सुधार करें

    कदम-कदम पर भ्रष्टाचार ने अब मेरी जीने की इच्छा खत्म कर दी है.. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें मैंने जो भी कदम उठाया है. वो सब मज़बूरी मैं लिया गया निर्णय है. हो सकता कुछ लोगों को यह पसंद न आये लेकिन जिस पर बीत रही होती हैं उसको ही पता होता है कि किस पीड़ा से गुजर रहा है.

    मेरी पत्नी और सुसराल वालों ने महिलाओं के हितों के लिए बनाये कानूनों का दुरपयोग करते हुए मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज करवा दिए..मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं थोड़ी बहुत पूंजी अपने कार्यों के माध्यम जमा की थी.सभी कार्य बंद होने के, बिमारियों की दवाइयों में और केसों की भागदौड़ में खर्च होने के कारण आज स्थिति यह है कि-पत्रकार हूँ इसलिए भीख भी नहीं मांग सकता हूँ और अपना ज़मीर व ईमान बेच नहीं सकता हूँ.

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  16. बहुत सुन्दर रचना... विचारों की अच्छी अभिव्यक्ति है

    आभार
    फणी राज

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  17. बहुत बढ़िया,क्या बात भाई.

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  18. सुनील जी......
    बहुत प्यारी भावनाएं हैं इस कविता में....

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  19. ये आपका ही नहीं , सभी का सवाल है...
    मेरी किस्मत में वो क्यों था ?

    --------------------------------------------
    क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है ?

    बाबा का अनशन टुटा !

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  20. उसका जीवन एक कथा है ,मेरा जीवन एक व्यथा है ।
    मार्मिक अभी व्यक्ति और एक यथार्थ भी एक साम्य भी -ये जो तारे तारे पास पास नजर आतें हैं पृथ्वी से हज़ारों हज़ार मील दूर हैं परस्पर .भीड़ में ये भी अकेले हैं वे जो एक तारा मंडल तारा समूह बनाते लगतें हैं ,लघु सप्त ऋषि और अरसा मेजर वो भी भैया दूर दूर हैं .लेकिन प्रकृति विच्छिन्न होते हुए भी हमें साथ रहने का सन्देश देती हैं संयुक्त होने का आवाहन करती हैप्रकृति का एक तंत्र है एक विधान है
    और हम -भाई संजीव सलिल के शब्दों में -
    नहीं एक क़ानून है ,नहीं एक है नीति
    आतंकी पर प्रीती है ,और संत हित भीति।
    सुन्दर भाव अभिव्यक्ति के लिए बधाई .

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  21. चलो एक तारा तो मिला वर्ना एकतारा बजाते रह जाते:)

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  22. कथा और व्यथा का अंतर आपने अपनी रचना के माध्यम से अच्छी तरह समझा दिया .

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  23. सुन्दर प्रतीक ... संवेदनशील रचना ...

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  24. अच्छी कविता। क्या बात है

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  25. प्रतीकात्मक रचना ...

    भाव सुन्दर .. जो मिला वही भला

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