गुरुवार, जून 23, 2011

विचारों का जीवन चक्र



ज़ारी है अनवरत,
विचारों का अवागमन
मष्तिक के आँगन में
कुछ का एक पल ठहरना
और चले जाना
कुछ का आपसी
द्वन्द में ,
समाप्त हो जाना |
बचे हुए विजयी विचारों का
मष्तिक में,
हलचल पैदा करना|
और कुछ क्रियान्वित
होने से पूर्व,
परिणाम की सोंच कर
मर जाते है|
जो बचते है,
वही आदमी की,
पहचान बनाते है |




28 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति ये विचारों का ही आवागमन है जो हमें हमारी पहचान देता है

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  2. जो बचते है वही आदमी की पहचान बनते हैं . सत्य ही लिखा है ...

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  3. विचारों का विचार |

    बेहद मजेदार ||

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  4. सच तो यह है कि विचारों की मौत ही नहीं होती और वही व्यक्ति की पहचान बनते हैं!!

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  5. हमारे विचार ही हमारी पहचान बनते हैं।

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  6. जो बचते है वही आदमी की पहचान बनते हैं ....
    लाजवाब प्रस्तुति ........

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  7. सटीक बात कही है ..विचारों से ही इंसान की पहचान होती है ..

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  8. जो बचते है,
    वही आदमी की,
    पहचान बनाते है |

    व्यक्ति के विचार ही उसके व्यक्तित्व का निर्धारण करते हैं ....!

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  9. आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!

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  10. बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना लिखा है आपने ! बधाई!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  11. जीवन संघर्ष का नाम है।
    इस संघर्ष से जो पार पा गया वहीं जीवन के अर्थ को समझ गया और तर गया

    अच्‍छी रचना
    शुभकामनाएं आपको

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  12. बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुति....आभार

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  13. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (25.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  14. एक नए अंदाज में सुन्दर रचना |एक-एक शब्द प्रभावी है |बधाई|

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  15. प्रशांति -भाव की कविता

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  16. विचार कभी नहीं मरते बल्कि संप्रेषित होकर अमर हो जाते है आपने सही कहा आदमी की पहचान बनाते है

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  17. गहन भावों के साथ ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  18. वाह ! कितने सरल शब्दों में आपने तो विचारों की पोल ही खोल दी, यानि कि मानव मन की... या फिर कहें तो मानव की ही क्योंकि इन्हीं विचारों के कारण ही तो हर कोई खुद को कुछ का कुछ समझता है...बहुत सुंदर रचना !

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  19. बहुत गहन अनुभूति के साथ सुन्दर रचना....

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  20. मस्तिष्क की हलचल तो चलती ही रहती है, इसमें से कितना कुछ बाहर निकलता है और कितना दब जाता है दफन हो जाता है :)

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  21. सटीक बात...सुंदर विचारयुक्त कविता...

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  22. Thoughts light like gleams my spirit's sky ,
    but they will not remain .
    They light me once and hurry by ,
    and never come again .
    Beautiful poem !!

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