शनिवार, जून 04, 2011

बदलते मिज़ाज की ग़ज़ल ..


 तंगहाली का एक पत्थर जो आकर  मेरे आँगन  में गिरा ,
 ख्वाहिशों को अपाहिज़ और ज़ज्बों  को लंगड़ा कर गया |

जो तफ़्सील से सुना रहा था  ज़माने की दास्ताँ ,
वह अपने दिल की बात  बस इशारों में कह गया | 

दो चार शेर क्या  पढ़  दिए, मैंने उसकी शान में ,
रियाया समझ कर अपनी, वह मुझपे राज कर गया |

मुहब्बत क्या मिली उसको  वह खुद को दौलतमंद समझ बैठा  ,
एक दिन तो वह अमीर ए शहर को भी नज़र अंदाज़  कर गया |

  ना जाने अपने कलाम में, मैंने ऐसा क्या पढ़  दिया ,
 मुझे इतनी मिली दाद कि मै खुद हैरान रह गया |



41 टिप्‍पणियां:

  1. पहली दो पंक्तिया ..पूरी ग़ज़ल की जान है
    बहुत खूब लिखा है खूब likha hai

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  2. शानदार दिल को छूती गज़ल्………और पहला शेर तो कमाल है।

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  3. तंगहाली का पत्थर ख्वाहिशों को अपाहिज कर गया और एक और सपने पर ताला लगा गया ....

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  4. जमाने की बात बडचढ कर बताई और अपनी बात इशारों में कह गया । बहुत सुन्दर । अच्छा ये भी बहुत बढिया कि उनकी शान में कुछ कह दिया तो मालिक ही बन गया । यह उसकी गलती न थी जब मोहब्बत मिलती है तो ऐसा ही होता है सौरी ऐसा ही होता होगा । अब आपके इस शेर पर मैं कितनी दाद दूं हैरान मत होइयेगा

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  5. खुबसुरत रचना। बधाई के पात्र है।

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  6. ना जाने अपने कलाम में, मैंने ऐसा क्या पढ़ दिया ,
    मुझे इतनी मिली दाद कि मै खुद हैरान रह गया |
    bahut khoob .aabhar

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  7. क्या सुनाई बदलते मुजाज़ की कविता
    दाद देने वाला भी दाद देते देते डर गया :)

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  8. गजल में भाव पूरी तन्मयता से अभिव्यक्त हुए हैं ...अंतिम शेर लाजबाब है ....आपका आभार

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  9. सुनील जी,
    बहुत ही प्यारी ग़ज़ल है।
    हर शेर लाजवाब।

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  10. वाह वाह सुनील जी, कमाल की गजल रच डाली।

    आभार

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  11. बहुत बढ़िया लिखा है ,सुनील जी,वाह

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  12. बहुत मर्मस्पर्शी रचना है

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  13. मुहब्बत क्या मिली उसको वो खुद को दौलतमंद समजने लगा ....
    बहुत बढ़िया ....
    आभार
    तृप्ती

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  14. बहुत खूब ... रियाया समझ कर राज कर गया .... ऐसा ही होता है ...

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  15. बहुत खूब !मुबारक भाई साहब ताज़ा ग़ज़ल .

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  16. सी हैरान्गियाँ भी क्या खूब होती हैं -उम्दा अंदाजे बयां !

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  17. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  18. हम बेखुदी में उनको पुकारे चले गए। शायद इसी बेखुदी में कुछ हैरान करने वाली बात लिख गए होंगे। अच्छी रचना।

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  19. वाह ! क्या बात है! बेहद ख़ूबसूरत, शानदार और ज़बरदस्त ग़ज़ल लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम!

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  20. ना जाने अपने कलाम में, मैंने ऐसा क्या पढ़ दिया ,
    मुझे इतनी मिली दाद कि मै खुद हैरान रह गया |

    वाह ... यह तो बहुत ही अच्‍छा लिखा है ।

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  21. मुहब्बत क्या मिली----- वाह बहुत खूब। पूरी गज़ल अच्छी लगी। बधाई।

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  22. sunil ji aapke prerak kavya sandesh bahut kuchh kah jate hain . bahut bahut abhar ji

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