क्यों बदल गयी यकायक हवाओं की खुशबू ,
शायद तेरे घर की आज खिड़की खुली होगी |
क्यों गुम हो गयी यकायक आसमां से चाँदनी,
शायद एक जुल्फ तेरे चेहरे पर आ गयी होगी |
बेजान दिल ने फिर से धड़कना भी शुरू कर दिया,
शायद तेरे क़दमों की आहट, दिल को आ गयी होगी |
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| अनुभूति सांस्कृतिक मंच के पदाधिकारी के साथ में डा . राधे श्याम शुक्ल,सम्पादक स्वतन्त्र वार्ता,हिंदी दैनिक हैदराबाद |
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| प्रो . ऍम वेंकटेश्वर बच्चों को यूनीफार्म वितरित करते हुए |
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| कविता पाठ करता हुआ और साथ में हैं डा .किशोरी लाल व्यास ,नेह्पाल सिंह वर्मा , श्री विट्ठल भाई पटेल ( राज्य सभा सांसद एवं गीतकार ) रत्न कला मिश्र ,और शिवमोहन लाल श्रीवास्तव |
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| मैं यहाँ भी हूँ ! |