मंगलवार, मई 31, 2011

सत्य कथा विशेषांक ( हास्य कविता )



अक्सर हास्य कवियों पर यह आरोप लगते है कि वह लतीफों को पंक्तिबद्ध 
करके रचनाएँ लिखते है | मगर मेरा मानना है कि हास्य कवि दोहरी भूमिका 
निभाता है | इस व्यथित समाज को हँसाने के साथ  साथ सन्देश भी देता है |
चलिए एक आरोप और लगा दीजिये |


एक सम्पादक के मन में 
एक विचार आया | 
 और तुरंत ही उसने ,
एक विज्ञापन छपवाया |
हमारा अगला अंक ,
 सत्य कथा विशेषांक होगा |
और घटनाओं  की सत्यता ,
चयन का आधार होगा |
तब हो गया एक चमत्कार ,
रचना आयीं पूरी पचास हज़ार |
मगर एक ही शीर्षक,
आ रहा था बार बार 
नेताओं का भ्रष्टाचार , नेताओं का भ्रष्टाचार 

30 टिप्‍पणियां:

  1. badiyaa katakch karati hui anoothi rachanaa badhaai aapko.



    please mere blog aaiye.thanks.

    उत्तर देंहटाएं
  2. NETA HI JYADA BHARAST HOTE HAI. . . . JAI HIND JAI BHARAT

    उत्तर देंहटाएं
  3. क्या करे सुनील जी जो दिखेगा वही तो वो लिखेगा, अब ये हास्य हो कुछ और, सटीक सत्य कथा

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह बहुत खूब .......भ्रष्टाचार का हर तरफ है बोलबाला

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह ..इससे अधिक सत्य क्या होगा .

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज के समय में प्रासंगिक रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया।
    कटाक्ष तभी अच्छा लगता है जब वह सत्य के बिलकुल करीब होता है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बिलकुल सत्य कथा है .... नेताओ का भ्रष्टाचार...
    सटीक कटाक्ष..

    उत्तर देंहटाएं
  9. सहमत हे जी आप की बातो से, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. एकदम सही रचनाएं आईं.. ;)

    उत्तर देंहटाएं
  11. sunil bhai ji
    bahut hi maza aaya aapki saty katha -vishheshhank padh kar .kya nahle par dahl maara hai .

    hasy ka hasy bhi aur aaj ki yatharthta ke bahut nikat ,saty ko parilxhit karti hai aapki ye majedaar post----
    bahut bahut badhai
    sadar naman
    poonam

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही सटीक कहा है.....आभार

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुनील जी, बिल्कुल सही कहा। सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुनील जी सुन्दर रचना आज के समय का सत्य है भी यही -जहाँ नजर दौडाओ भ्रष्टाचार ही ....

    कृपया और "घटनाओं" की सत्यता को ठीक कर दें

    शुक्ल भ्रमर ५

    उत्तर देंहटाएं
  15. अपने समय का यही सच है .......भ्रष्टाचार ही अब आचार है .

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सुन्दर और सटीक लिखा है आपने ! सच्चाई को बड़े ही सुन्दरता से प्रस्तुत किया है!

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाह ! वाह ! सत्य कथाओं का लग गया भंडार, लगता है अब तो जागेगी सरकार !

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत दिलचस्प .... बहुत रोचक ....

    उत्तर देंहटाएं
  19. आज के दौर में इससे सत्‍य कथा और क्‍या हो सकती है
    बहुत अच्‍छी रचना

    उत्तर देंहटाएं