मंगलवार, मई 03, 2011

वह लम्हा ( मतला और एक शेर )



मेरी पिछली पोस्ट" शेर यूँ मुकम्मल हुआ  " पर एक बेनामी टिपण्णी ने मुझे आपनी 
गलती का अहसास करा  दिया | जिसके अनुसार किसी की सृजन क्षमता को परखने 
का मुझे कोई अधिकार नहीं है | अत आपसे क्षमा चाहूँगा |
लीजिये आज फिर  मतला  और एक शेर अर्ज है |



उस लम्हे की भी 
कुछ और कहानी होती |
ग़र उसकी अदायगी 
तेरी जुबानी होती |

अगर समुन्दर में 
तूफान ना आया होता |
मेरी कश्तियों की भी 
कुछ और कहानी होती |


28 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता
    अगर तूफ़ां नहीं आता किनारा मिल गया होता :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. पहली बार आप का लिख शेर पढ़ रही हूँ ,अच्छा लगा |

    उत्तर देंहटाएं
  3. "gar samundar me toofaan n aayaa hotaa ,
    kashtiyon kee bhi kuchh aur kahaani hoti "
    Zindgi kitni ruhaani hoti ,
    teri meri kahaani hoti ,
    gar mausam kee meharbaani hoti ,
    baat karne me ravaani hoti .
    veerubhai .
    (Teach me to comment in Hindi .).

    उत्तर देंहटाएं
  4. उस लम्हे की भी
    कुछ और कहानी होती |
    ग़र उसकी अदायगी
    तेरी जुबानी होती |

    अगर समुन्दर में
    तूफान ना आया होता |
    मेरी कश्तियों की भी
    कुछ और कहानी होती |
    भाई सुनील कम शब्दों में बहुत बड़ी बात आपने कह दिया बधाई और शुभकामनाएं |

    उत्तर देंहटाएं
  5. अच्छी शुरुआत है,आहिस्ता आहिस्ता पूरी ग़ज़ल भी कह लेंगे.

    उत्तर देंहटाएं
  6. उस लम्हे की भी
    कुछ और कहानी होती
    गर उसकी अदायगी
    तेरी जुबानी होती !
    यही तो सबकी मुश्किल है
    पर ऐसा होता नहीं !

    उत्तर देंहटाएं
  7. क्या बात है भाई क्या बात है। तू कहता तो बात ही कुछ और होती और साथ ही समुद्र में तूफान न आता तो कश्ती की कहानी ही बदली हुई होती ।
    एक निवेदन और मैने आपकी रचना शेर यूु मुकम्मल हुआ में उस वेनामी टिप्पणी को तलाशा जिसमें आपकी गलती का अहसास कराया गया है मगर वह टिप्पणी मुझे मिली नहीं ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुंदर प्रस्तुति, तूफानों से टकराने पर कभी कभी नयी दास्तानें बन जाती हैं..

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही खूबसूरत अलफ़ाज़....

    उत्तर देंहटाएं
  11. अब क्या कहूँ, बढ़िया ,बहुत बढ़िया या कुछ और.कुछ न कुछ तो बात है ही आपकी प्रस्तुति में.

    उत्तर देंहटाएं
  12. BAHUT BHAV PURN RACHNA PADHNE KO MILI ISKE LIYE DHANYWAD. . . . . . JAI HIND JAI BHARAT

    उत्तर देंहटाएं