बाल कविताओं में व्यंग्यात्मक पुट , जी हाँ अचानक आज मुझे
अपने बचपन की दो कवितायेँ याद आ गयीं | इनके रचियता तो
मुझे मालूम नहीं है मगर उनकी छाप मेरे जहन में आज भी है |
जहाँ तक मुझे ज्ञात है कि बाल कवितों का उद्देश्य शिक्षाप्रद होता है |
मगर इनका क्या उद्देश्य है | अब आप ही बताइए .....
(१)
बिल्ली बोली चूहे भैया,
आओं मिलाओ हाथ |
बिल में क्यों छिप कर बैठे हो ,
मिल कर खेलो साथ |
चूहा बोला बिल्ली मौसी,
मुझको ना बहलाओ |
आँगन में है कुत्ते मामा
उनसे हाथ मिलाओ |
(२)
डाक्टर देखो भली प्रकार ,
मेरी गुडिया है बीमार |
परसों बरसा रिमझिम पानी
उसमे भींगी गुडिया रानी |
भींगे कपड़े दिए उतार,
फिर उसको चढ़ा तेज बुखार |
सौ के ऊपर डिग्री चार |
डाक्टर देखो भली प्रकार
जब तक गुडिया रहे बीमार
तब तक पैसे रहे उधार|





