मंगलवार, मार्च 08, 2011

बाल कविताओं में व्यंग्यात्मक पुट


बाल कविताओं में व्यंग्यात्मक पुट ,  जी हाँ अचानक आज मुझे 
अपने बचपन की दो कवितायेँ याद आ गयीं | इनके रचियता  तो 
मुझे मालूम नहीं है मगर उनकी छाप मेरे जहन में आज भी है |
जहाँ तक मुझे ज्ञात है कि बाल कवितों का उद्देश्य शिक्षाप्रद होता है |
मगर इनका क्या उद्देश्य है | अब आप ही बताइए .....

       (१)

बिल्ली बोली चूहे भैया, 
आओं मिलाओ हाथ |
बिल में  क्यों छिप कर बैठे हो ,
मिल कर खेलो साथ |
चूहा बोला बिल्ली मौसी, 
मुझको ना बहलाओ |
आँगन में है कुत्ते मामा 
उनसे हाथ मिलाओ |

          (२)

डाक्टर देखो भली प्रकार ,
मेरी गुडिया है बीमार |
परसों बरसा रिमझिम पानी 
उसमे भींगी गुडिया रानी |
भींगे कपड़े दिए उतार,
फिर उसको  चढ़ा तेज  बुखार |
सौ के ऊपर डिग्री चार |
डाक्टर देखो भली प्रकार
जब तक गुडिया रहे बीमार 
तब तक पैसे रहे उधार| 


23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर और शिक्षाप्रद कविता| धन्यवाद |

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  2. बच्चों के लिए सिर्फ शिक्षाप्रद ही कुछ मनोरंजक कवितायेँ भी होनी चाहिए, जिसमे ये खरी उतरती है.

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  3. दोनों ही कवितायें बाल मन को भाने और गुदगुदाने में सक्षम हैं !
    सुन्दर, सरस और सरल !

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  4. पहली कविता में चुहेजी बहुत होशियार हैं और दूसरी कविता में गरीबी की झलक मिलती है या फिर भरोसे की कमी !

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  5. बेहद अच्छी रचनाएँ.
    मुझे बच्चा बनकर गाने में आनंद आया.

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  6. पहले नहीं सुनी पर सुनने में आनन्द आ गया।

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  7. बच्चों को सिखाने में काम आएँगी. मनभावन.

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  8. निसंदेह व्यंग की बेहतरीन छटा देखने को मिली इन रचनाओं में ।

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  9. व्यावहारिक बातों को जीवन में उतारने की सीख देतीं ये रचनाएँ अच्छी हैं . मेरी बधाई स्वीकारें -अवनीश सिंह चौहान

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  10. पहली रचना में चूहे की चालाकी और दूसरी में बिटिया की मासूम सी चतुराई ...

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  11. मैं पिछले कुछ महीनों से ज़रूरी काम में व्यस्त थी इसलिए लिखने का वक़्त नहीं मिला और आपके ब्लॉग पर नहीं आ सकी!
    आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    बहुत सुन्दर और उम्दा रचना लिखा है आपने ! बेहतरीन प्रस्तुती!
    आपकी लेखनी को सलाम !

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  12. halki phulki rachnaye bhi kabhi kabhi man prsann kar jati hai....
    bahut sunder lagi....

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  13. चूहा बिल्ली से ज़ियादा और तीमारदार डॉक्टर से ज़ियादा चालाक निकले.

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  14. मुदई हस्त और गवाह सुस्त वाली कहावत चरितार्थ हुई

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