गुरुवार, मार्च 31, 2011

हास्य कवि और उनकी कविता



अक्सर हास्य कवियों पर यह आरोप लगते है कि वह लतीफों को पंक्तिबद्ध 
करके रचनाएँ लिखते है | मगर मेरा मानना है कि हास्य कवि दोहरी भूमिका 
निभाता है | इस व्यथित समाज को हँसाने के साथ  साथ सन्देश भी देता है |
चलिए एक आरोप और लगा दीजिये |



एक पत्र, एक संपादक को
बहुत परेशान कर रहा था |
क्योंकि एक पाठक  बार बार
पृष्ठों की संख्या और आकार
बढ़ाने का आग्रह कर रहा था |
संपादक ने विनम्रता से पूछा  
 हे सरस्वती पुत्र  साहित्य प्रेमी 
 हम आपका सम्मान करते है | 
मगर यह तो बताएं ?
की आप साहित्य की किस ,
विधा में सृजन कार्य करते है |   
उसने कहा  श्रीमान जी ,
मेरा साहित्य से  कोई नहीं सरोकार है |
मेरा तो लिफाफे बनाने का कारोबार  है |





27 टिप्‍पणियां:

  1. एक सार्थक सन्देश का सम्प्रेषण

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  2. यह भी खूब कही सुनील जी. हास्य भी आवश्यक अंग है जीवन का.

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  3. व्यंग में भी एक सन्देश... इस सुन्दर रचना के लिए आपका बहुत - बहुत आभार..

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  4. हा हा!! उसका फायदा इसी में है. :)

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  5. बहुत सटीक टिप्पणी की है आपने !

    कुछ रद्दी होकर छप जाता है
    कुछ छपकर रद्दी बन जाता है

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  6. हा..हा...हा...हा...
    आनंद आ गया भैया यहाँ क्या मासूमियत है :-)

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  7. हा --हा --हा---हा --
    वाह !सुनीलजी ,क्या कविता रचित की है --भाई आनंद आ गया --बेचारे लिफ़ाफ़े बनाने वाले को साहित्य से क्या लेना देना हा --हा --?

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  8. लिफाफे वाला अपनी दुकान चलाने का सार्थक प्रयास कर रहा है . किसी विज्ञापन कंपनी को स्लोगन के रूप में प्रेषित करे सहज स्वीकार हो जायेगा

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  9. हा हा हा
    उसके लिए तो लिफाफा निर्माण ही साहित्य सर्जना है

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  10. Sunil jee, utsukta jab hansi me badal jaye to pet me bal par jata hai...ha!ha!ha!....bahut achchhi lagi...aage v pratiksha hai..

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  11. हँसाना कहाँ आसान काम होता है ....भोजीपुरा अरे आप तो मेरे जन्मस्थान के पडोसी निकले ...किच्छा तो जरुर सुना होगा आपने ...

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  12. ये भी ठीक कही ... सबका अपना अपना राग ...

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