सोमवार, मार्च 21, 2011

भिखारी और हम


सड़क पर बैठा भिखारी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रहा था 
और अपने खाली डिब्बे को बजा रहा था
हमने पूछा क्यों मचा रहा बबाल है 
वह प्यार से बोला राम के नाम पर एक रुपये का सवाल है |
हमने कहा सड़क पर भीख माँगते शर्म नहीं आती ?
वह हंसकर   बोला " क्या ऑफिस खोल लूँ "?
फिर गुस्से में बोला हम  सड़क पर बैठते साब
इसलिए राम के नाम पर नोट मांगते है |
ऑफिस तो वह खोलते है जो राम के नाम पर वोट मांगते है |
उसके इस उत्तर ने हमें खुश कर दिया |
और हमने एक सिगरेट पेश कर दिया |
वह बोला क्या इससे   फायदा ?
हमने समझया सिगरेट पिएगा तो वक्त से पहले मार जायेगा| 
इस गरीबी से निजात पा जायेगा 
गरीबी तो हट नहीं सकती एक गरीब हट जायेगा |
गरीबी हटाओ का नारा देने वाला नेता 
चुनाव में दो चार वोट ज्यादा पा जायेगा |
और किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जायेगा |
वह बोला क्या इससे   फायदा ?
हमने याद दिलाया वह गाना 
है फर्ज आदमी का औरों  के काम आना |
वह बोला क्यों जी हमें बुद्धू बनाते हो 
और ज़िंदगी की कीमत मौत बताते हो |
हमने कहा चल दो चार पल और जी ले 
यह ले दारू एक पेग पी ले |
वह बोला क्या इससे   फायदा ?
हमने कहा एक पेग पिएगा तो बोतल की आदत पड़  जाएगी |
कुछ दिनों में तेरी दोनों किडनी सड़ जाएगी 
जब तू किसी डाक्टर के चुंगल में आएगा 
तो अपनी दोनों किडनी वापस लेकर आयेगा|
क्यूंकि ख़राब किडनी कोई नहीं निकलता 
एक डाक्टर किडनी चोरी के पाप से बच जायेगा |
अब उसने नही पूछा क्या फायदा 
क्योंकि याद आ गया वह गाना 
 है फर्ज आदमी का औरों  के काम आना ...


22 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर कटाक्ष करती बढ़िया कविता. नव वर्ष की शुभकामनाएँ.

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  2. सही है गरीबी मिट नहीं सकती गरीबो को ही मिटा दिया जाये |

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  3. बहुत अच्छा व्यंग.... आभार...

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  4. बहुत बढिया व्‍यंग्‍य।
    सुनील जी आपने अच्‍छा कटाक्ष मारा।
    शुभकामनाएं आपको।

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  5. सुन्दर कटाक्ष.
    यह तो फायदे वाली कविता है.
    सलाम.

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  6. दूषित राजनीति पर करारा व्यंग.

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  7. वाह सुनीलजी, व्यंग बहुत बढ़िया किया है...
    चारों सामाजिक बुराइयाँ: मद्यपान, सिगरेट, भीख-मांगना और हाँ राजनीती भी (आजकल देश चलाना और राजनीती करना अलग-अलग है) हमारे समाज के लिए हानिकारक हैं!

    बधाई...

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  8. वर्तमान समय की मुख्य समस्यायों को समेट लिया है आपने, आभार.

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  9. Bahut khoob, aaj ki sabhyata par chot karta sarthak vyang sandesh..shubhkaamnayein!

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  10. कविता के माध्यम से करारा व्यंग्य सुनील जी ,हिन्दू नव-वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये !

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