शुक्रवार, मार्च 04, 2011

आज बस मतला और एक शेर



 आज मै चिरागों को 
बुझाना चाहता हूँ |
मैं अकेला हूँ यह, 
 ज़माने को दिखाना चाहता हूँ | 

मौत को  तो गले ,
लगाना है एक  दिन |
मग़र ऐ ज़िन्दगी,
तुझे भी आजमाना चाहता हूँ | 



40 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर विचार युक्त

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  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (05.03.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  3. Bahut hee sundar! Yun to zindagee hame aazmaatee rahtee hai!

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  4. आज मै
    चिरागों को बुझाना चाहता हूँ
    मैं अकेला हूँ
    ज़माने को दिखाना चाहता हूँ

    .. बेहतरीन अभिव्यक्ति बधाई

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  5. क्या शेर मारा हे सुनील जी, बेहद खूब सुरत ..

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  6. मग़र ऐ ज़िन्दगी, तुझे भी आजमाना चाहता हूँ |
    बेहतरीन...!

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  7. मैं भी यही कहूँगा कि 'अच्छा है'. इसे पूरा कीजिए अच्छी ग़ज़ल बनेगी.

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  8. बहुत खूब कहा है आपने ...
    सुन्दर भाव संयोजन ।

    कृपया पूरी ग़ज़ल भी दें....,
    यकीनन बेहतरीन ग़ज़ल होगी.

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  9. sunil ji meri to yehi salah hai
    jindgiko hi ajmana chahiye.....
    bahut achi lagi......

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  10. सुनील कुमार जी ,
    एक मतला और एक शेर ....
    बहुत खूब...लाजवाब....
    पूरी ग़ज़ल भी लाजवाब होगी. बधाई और शुभकामनाएं |

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  11. बहुत सुन्दर .... धन्यवाद सुनील जी !

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  12. जिंदगी तुझे भी आजमाना चाहता हूँ.. बेहद खूबसूरत........

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  13. वाह , क्या कहना !

    जितना लिखा उतना ही काफी है.........कविता पूरी है

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  14. बहुत अच्छी लगी पंक्तियाँ| धन्यवाद|

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  15. सुनील जी दोनों शेर लाजवाब हैं इसे आगे बढ़ाइए. धन्यवाद.

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  16. बहुत ख़ूब...
    आपका यह अंदाज अच्छा लगा।

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  17. इतने कम शब्दों में कितनी बात कह दी आपने...

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  18. वाह ... कमाल के तेवर हैं इन शेरों में ... मौत को आजमाना ... गज़ब ख्याल है ....

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  19. bahut khoob sunil bhai ji .
    ati sundar aur behad damdar.in chhote se sheron me aapne bahut kuchh kah diya.
    dhanyvaad avam badhai
    poonam

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  20. यकीनन जिदंगी ने हमें बहुत आजमा लिया अब उसकी बारी है। उम्दा शेर।

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  21. .

    मगर ऐ जिंदगी तुझे भी आजमाना चाहता हूँ...

    वाह !...क्या बात है .. A beautiful challenge to life !

    .

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  22. आमीन, इंशाअल्लाह हौसला बना रहे !

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  23. पहली बार आपके घर आया तो द्वार पर ही ठिठक गया. शिवांगी और आरुषी के चित्रों ने ब्लॉग की चौखट सुन्दर सजायी है. उन्हें बधाई दें.
    आपके शेरो ने मुझे नहीं डराया. बस काफी देर मुग्ध हो चित्रों का आनंद लेता रहा.

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  24. मौत को तो गले लगाना है एक दिन,
    मगर ऐ ज़िन्दगी तुझे भी आज़माना चाहता हूँ !
    अच्छा शेर !
    आभार !

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