बुधवार, फ़रवरी 09, 2011

माँ तो आख़िर माँ ही है

    
      अभावों से मेरा हमेशा चोली दामन का साथ रहा है  | बचपन से शुरू क्या
हुआ आज तक मुझे यह छोड़ने को तैयार नहीं है | कई  बार वक्त ने कोशिश भी
 की मग़र हमारी दोस्ती नहीं टूटी | और धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के पूरक
बन गए | बेटे की फ़ीस जमा करने की आखिरी तारीख़ मुझे ऐसी लग रही थी
जैसे  मेरी फाँसी का दिन नियत कर दिया गया है | उस पर बेटी की शादी की चिंता
मकान मालिक आज कल मुझे यमराज लगता था | कुल मिला कर एक आम
आदमी की सभी समस्याएं मेरे आगे पीछे घूम रही थी  | इन समस्याओं का हल
 मुझे आत्महत्या की सिवा दूसरा कोई नज़र नहीं आ रहा था | अचानक फोन
की घंटी बजी बड़े भाई का फोन था" माँ नहीं रहीं " यह खबर मेरे लिए फाँसी का फंदा
गले तक आने जैसी थी | माँ के मरने का दुख उस पर गाँव आने जाने के किराये की
चिंता में डूबा हुआ बहुत देर तक कुर्सी पर बैठा रहा | पत्नी और बच्चे मेरे आसपास
घेरा बना कर खड़े थे जैसे क़ी मै कोई  मदारी हूँ | मेरा अगला खेल क्या होगा ?
अचानक ही मुझे कुछ याद आया और चल पड़ा स्टेशन क़ी ओर माँ के अंतिम दर्शन
के लिए रास्ते भर माँ के बारे में सोचता रहा ओर माँ क़ी ममता ओर उसके त्याग क़ी
कहानी मुझे सच्ची लगने लगी थीं | क्योंकि पिता क़ी वसीयत के अनुसार माँ के मरने
 के बाद खाते में जमा पैसे हम दो भाई में बाँट दिए जाएँ | अब मेरी आँखों से आंसू
बह निकले थे उस माँ के लिए जो खुद मर कर  मुझे एक नई ज़िंदगी दे गयी .........
  और दिल ने कहा माँ तो  आख़िर माँ ही है ..................

44 टिप्‍पणियां:

  1. माँ की ममता जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है.. माँ अपने बच्चों के लिए क्या है जो नहीं कर सकती..सब कुछ न्योछावर कर चली जाती है ... आँखे भर आईं......

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  2. मां होती ही ऐसी है। दुनिया में ऊपर वाले ने एक मां ही तो बनाई है जो खुद भी मर कर बच्‍चों को नया जीवन दे जाती है। अच्‍छी पोस्‍ट।
    सुनील जी, सच में आपकी हर पोस्‍ट दिल से, दिल के करीब होती है।

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  3. बिलकुल सही ..सिर्फ माँ.....कोई शब्द नहीं वयां कर सकता माँ को ...आपका आभार

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  4. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (10/2/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  5. माँ की महानता को दर्शाती एक भावभीनी, मार्मिक कथा !

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  6. सुनील जी,
    इस जग में माँ सा दूसरा कोई नहीं !
    बड़ा ही मार्मिक चित्रण है !

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  7. बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है मनोभावों का.

    सादर
    _________
    इस बसंत के मौसम में क्यों ...

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  8. माँ .
    ईश्वर के सिवा इसका कोई synonym नहीं.
    सलाम.बहुत मार्मिक चित्रण.

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  9. माँ तो सदा ही भला चाहती है...बच्चों की ख़ुशी चाहती है.....

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  10. माँ तो आखिर माँ है....
    "जीवन के साथ भी जीवन के बाद भी..."

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  11. माँ निसंदेह माँ होती है , उसकी ममता का मुकाबला नहीं।

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  12. भाई सुनील कुमार जी ,
    बहुत अच्छी बात कही है | माँ तो माँ ही होती है , उसका कोई विकल्प नहीं |

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  13. माँ तो माँ ही है, उस जैसा कोई और कहाँ !

    -------------------------------------------------
    कृपया इसे भी देखें ! माँ

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  14. माँ, अपने बच्चों के लिए..भगवान का ही दूसरा रूप होती है। पोस्ट दिल को छू गई।

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  15. सुनील जी! कुछ भी कहने के लायक नहीं छोड़ा आपने!! बस दिल में एक टीस लिये जा रहा हूँ!!

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  16. Sunil ji,
    Aapki rachana padhake dil tadap jata hai.
    Har koi roya hoga aur man hi man apni maa ko yaad kar raha hoga.
    Bahot bahot dhantavad.
    A C Kulkarni

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  17. इसीलिए तो माँ को भगवान का दर्ज़ा देते हैं...
    इतना सिर्फ वो ही सोच सकती है...

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  18. बहुत दिल को छूने वाली पोस्ट.

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  19. मां की ममता की कोई उपमा नहीं।

    पढ़कर आंखें नम हो गईं।

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  20. दिल को इतनी गहराई से छू गयी कि आँखो से आँसू छलक आये ।
    सच माँ जितना पवित्र शब्द कोई और हो ही नही सकता ।

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  21. एक निवेदन...............सहयोग की आशा के साथ.......

    मैं वृक्ष हूँ। वही वृक्ष, जो मार्ग की शोभा बढ़ाता है, पथिकों को गर्मी से राहत देता है तथा सभी प्राणियों के लिये प्राणवायु का संचार करता है। वर्तमान में हमारे समक्ष अस्तित्व का संकट उपस्थित है। हमारी अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं तथा अनेक लुप्त होने के कगार पर हैं। दैनंदिन हमारी संख्या घटती जा रही है। हम मानवता के अभिन्न मित्र हैं। मात्र मानव ही नहीं अपितु समस्त पर्यावरण प्रत्यक्षतः अथवा परोक्षतः मुझसे सम्बद्ध है। चूंकि आप मानव हैं, इस धरा पर अवस्थित सबसे बुद्धिमान् प्राणी हैं, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारी रक्षा के लिये, हमारी प्रजातियों के संवर्द्धन, पुष्पन, पल्लवन एवं संरक्षण के लिये एक कदम बढ़ायें। वृक्षारोपण करें। प्रत्येक मांगलिक अवसर यथा जन्मदिन, विवाह, सन्तानप्राप्ति आदि पर एक वृक्ष अवश्य रोपें तथा उसकी देखभाल करें। एक-एक पग से मार्ग बनता है, एक-एक वृक्ष से वन, एक-एक बिन्दु से सागर, अतः आपका एक कदम हमारे संरक्षण के लिये अति महत्त्वपूर्ण है।

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  22. डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर किया पौधारोपण
    डॉ. दिव्या श्रीवास्तव जी ने विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर तुलसी एवं गुलाब का रोपण किया है। उनका यह महत्त्वपूर्ण योगदान उनके प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जागरूकता एवं समर्पण को दर्शाता है। वे एक सक्रिय ब्लॉग लेखिका, एक डॉक्टर, के साथ- साथ प्रकृति-संरक्षण के पुनीत कार्य के प्रति भी समर्पित हैं।
    “वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर” एवं पूरे ब्लॉग परिवार की ओर से दिव्या जी एवं समीर जीको स्वाभिमान, सुख, शान्ति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के पञ्चामृत से पूरित मधुर एवं प्रेममय वैवाहिक जीवन के लिये हार्दिक शुभकामनायें।

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  23. I am touched... truelly...
    Da most beautiful woman for evry gal n guy is thr mother... very nice post :)

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  24. बेहद ही मार्मिक एवं दिल को छूने वाली रचना।

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  25. मान्यवर धन्न्यवाद!
    आप हमारे ब्लॉग पर पधारे और अपनी सार्थक टिप्पणी दी।

    नन्हा पौधा
    हरा हरा एक नन्हा पौधा ,
    लगा मेरे उपवन में |
    जिसे देख कर फूल ख़ुशी के
    खिलते जाते मेरे मन में |
    धूप यह खाता , पीता पानी
    यही तो इसका दाना पानी |
    बढ़ते बढ़ते बढ़ जायेगा
    एक घना वृक्ष यह बन जायेगा |
    किसी राह का थका मुसाफ़िर ,
    इसके नीचे नींद चैन की सो जायेगा |

    -सुनील कुमार जी द्वारा प्रेषित
    http://sunilchitranshi.blogspot.com/

    देखिये:-
    http://pathkesathi.blogspot.com/

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  26. बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है मनोभावों का.
    सादर

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  27. awsam words.... bouth he aache shabad lkiye hai aapne aacha lagaa

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