मंगलवार, दिसंबर 06, 2011

माँ की ममता और पिता का फ़र्ज़



माँ की ममता के  क़सीदे
पढ़ने भी  वाजिब हैं |
मगर एक बाप का फ़र्ज़ भी, 
परवरिश में कुछ कम नहीं होता|

कहीं से ढूंढ़ कर लाओं , 
ऐसा बाप इस दुनिया  में |
जिसे अपनी औलाद की, 
नाकामियों पर ग़म नहीं होता | 

(चित्र गूगल के सौंजन्य से )

39 टिप्‍पणियां:

  1. भारतीय परिवेश में खरी उतरती क्षणिका ।

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  2. कम शब्दो मे गहरी बात कह दी।

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  3. खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बहुत बहुत बधाई ||

    terahsatrah.blogspot.com

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  4. माँ की ममता और पिता का प्यार ,दोनों ही बच्चे के भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक हैं !
    सुन्दर रचना !

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  5. असल में परोक्ष रूप से औलाद की नाकामियां मां-बाप की ना‍कामियां होती हैं।

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  6. सही कहा है सुनील जी ... दोनों का अपना महत्व है जीवन में ... दोनों के बिना जीवन पूर्ण नहीं है ...

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  7. बाप कहलाने का

    भला उसे क्या हक़ है,

    जिसे अपनी औलाद की,

    नाकामियों पर ग़म नहीं होता |

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  8. वाह क्या खूब कहा है !!! परवरिश को लेकर माता-पिता दोनों ही जिम्मेदार होते हैं मगर लोग माँ पर ही ज्यादा लिखते हैं आपने पिता को चुना आभार ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है। बहुत दिनों से आपका आगमन हुआ नहीं है वहाँ ....

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  9. पठनीय नहीं अपितु मनन करने योग्य ... हार्दिक शुभकामनायें

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  10. kavita samjh hi nahii aayii
    kyuki upar aur neechae kae bhaav me bahut antar haen

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  11. आदरणीया रचना जी आपके प्रश्न का उत्तर पल्लवी जी की टिप्पणी में है| |ब्लॉग पर आने के लिए आभार

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  12. आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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  13. मां की ममता पर तो काफ़ी कसीदे पढ़े जाते रहे हैं पर पिता पर ध्यान नहीं दिया गया जिसने ममता के साथ साथ भरण पोषण की भी जुगाड़ की। कोई भी पिता पुत्र की नाकामी पर उतना ही दुखी होता है जितना की मां। वही प्यार, वही वात्सल्य अपनी औलाद पर दोनों ही उडेलते है। यह भाव इस कविता में अच्छी तरह उभर कर आए हैं, जिसके लिए सुनिल भाई को बधाई॥

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  14. सीधे और सरल शब्दों में आपने गहरी और अर्थपूर्ण बात कह दी है ..

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  15. sahi kaha apne baccho ki parvarish me mata - pita dono ka hi yogdan hota hai..
    bahut hi acchi rachana hai..

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  16. सचमुच माँ यदि माँ है तो पिता भी पिता है... कुछ कम नहीं, सुंदर प्रभाव छोडती रचना !

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  17. बिल्कुल सही कहा है ..सटीक अभिव्यक्ति

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  18. yaani sunil ji aap maantae haen ki bachcho ki "nakami " unkae pita ko achchi nahin lagtee ???

    yae hi kaarna haen ki pita ke upar kam likhaa jaataa haen aur maa ke upar jyadaa kyuki maa bachchey ko bachcha mantee haen naakamyab aur kaayamabi sae nahin taultii haen

    parvarish kaa arth hi galat ho jataa haen agar usko kamyabi sae jodaa jaaye to

    yahii baat mae kehna chah rahee thee

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  19. माँ बाप दोनों सामान जिम्मेदारी होती है,..प्रभावशाली सुंदर रचना,..
    मेरे नए पोस्ट पर इंतजार है,....

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  20. बहुत सही कहा पिता भी बच्चों की परवरिश का पूरा पूरा
    फर्ज निबाहता है ...पर प्यार और फर्ज दोनों अलग बातें
    हें

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  21. बच्चा तो पतंग सा होता है और माँ -बाप पतंग के कन्ने । एक भी कन्ना टूट जाये तो पतंग असंतुलित हो गिरने लग जाती है । दोनों का महत्व एक दूसरे से बढकर ही रहता है ।

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  22. प्रोत्साहन का दूसरा नाम ही पिता है. सुंदर रचना सुनील जी.

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  23. सुंदर और मनन करने योग्य रचना....फिर भी ऐसा लगा लिखते समय आपके के दिल के भाव इन शब्दों के प्रभाव से कहीं ज्यादा गहरे रहे होंगे.....अच्छी लगी आपकी ये प्रस्तुति।

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  24. वाह, 'तीर' दिल को छूते हुए निकला - - -

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  25. कहीं से ढूंढ़ कर लाओं ,
    ऐसा बाप इस दुनिया में |
    जिसे अपनी औलाद की,
    नाकामियों पर ग़म नहीं होता |

    yahi sach hai bhai .... badhai

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