सोमवार, अगस्त 01, 2011

ऐसा क्यों ?





अगर तुम समुन्दर की तरह गरजो, 
तो हम इसको फ़ितरत तुम्हारी मान लें|
और तुम हमसे कहो कि हम एक,
खामोश दरिया कि तरह रहना सीख लें|  

(चित्र गूगल के सौंजन्य से)  

29 टिप्‍पणियां:

  1. Sir, Bahut hi kam shabdon mein bahut gahri baat kahi aapne.. Aabhar..

    उत्तर देंहटाएं
  2. हम दरिया बन जाएँ तभी तो दरियादिली नजर आयेगी...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह ..सिर्फ चार लाइनों (शेर)..कितनी गहरी बात कहें दी है आपने ....बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  5. khamoosh driya bnna jyada mushkil kam hai kyoki kisi bhav ko bhi bhoolne me jitna vkt lgta hai usse jyada vkt us bhav ke srijan me lgta hai .
    bhut khoobsoorst bhavabhivykti .
    mere bloh pr aane ke liye bhut bhut shukriya .

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह! क्या बात है! बहुत खूब लिखा है आपने! शानदार और ज़ोरदार प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  7. .......क्या बात है बहुत बढिया प्रस्तुति सुनील जी

    उत्तर देंहटाएं