सोमवार, अगस्त 08, 2011

यह बात................




यह बात, मेरे लिए
कुछ अजीब सी होगी|
जब तेरे घर में हो अँधेरा 
और मेरे घर रोशनी होगी| 

यह बात, मेरे लिए
कुछ  ख़ुशी की होगी| 
जब मेरे घर एक चिराग जले 
और रोशनी तेरे घर होगी |



42 टिप्‍पणियां:

  1. सुनील जी बहुत ही खूबसूरत अल्फाजों में रचना लिख डाली आपने बधाई स्वीकारें...

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  2. nishabd kr diya sr aapne.bahut khub..........
    abhaar
    P.S.Bhakuni

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  3. बहुत सुंदर! दिल रोशन रहे इतना ही काफी है और तभी होता है जब हम चिराग जलाया करते हैं औरों के लिए....

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  4. सुन्दर सोच के साथ लिखी गई रचना .......आभार

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  5. वाह! बहुत खूब लिखा है आपने! शानदार और ज़बरदस्त प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com

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  6. बहुत सुन्दर भाव ... कश लोंग दूसरों की खुशहाली पर यूँ ही खुश हो सकें

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  7. बहुत अच्छी सोच... अपने लिए जिए तो क्या जिए....

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  8. शब्द और सोच दोनों ही अच्छे लगे |

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  9. बहुत अच्छे विचार हैं आप के
    आमीन

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  10. bahut hi sunder bhav liye saarthak aur khoobsurat
    rachanss.badhaai sweekaren.

    "ब्लोगर्स मीट वीकली {३}" के मंच पर सभी ब्लोगर्स को जोड़ने के लिए एक प्रयास किया गया है /आप वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

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  11. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
    चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  12. अद्भुत प्रतिवेसी धर्म का परिचय दिया है!!

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  13. हमारे जीवन की सार्थकता इसी भाव में है।

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  14. जीवन की अस्तिव को बत्लालती रचना...

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  15. उर्दू अदबियात की जड़ में प्रवेश कर रहे हो सुनील भाई .बहुत सुन्दर अलफ़ाज़ और भाव सौन्दर्य की ग़ज़ल बधाई -

    ...क्‍या भारतीयों तक पहुंच सकेगी जैव शव-दाह की यह नवीन चेतना ?
    Posted by veerubhai on Monday, August 8
    Labels: -वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई), Bio Cremation, जैव शवदाह, पर्यावरण चेतना, बायो-क्रेमेशन ttp://sb.samwaad.com/ .शुक्रिया डॉ श्याम गुप्त जी .कृपया यहाँ भी बिराजें -
    http://veerubhai1947.blogspot.com/
    सोमवार, ८ अगस्त २०११
    What the Yuck: Can PMS change your boob size?

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  16. इस रचना को पढ़ कर पिछली लघु कथा याद आ गई...काश इसी भावना से भर कर हम कुछ भला कर जाएँ तो कितना अच्छा हो ...

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  17. बहुत अच्छी सोंच के साथ लिखी रचना.

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  18. क्या बात है, बहुत सुंदर
    आसान शब्दों में गहरी बात

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  19. 'अहा वही उदार है........ परोपकार जो करे
    वही मनुष्य है की जो मनुष्य के लिए मरे '
    .........................बहुत ही पवित्र मनोभावों की प्रस्तुति

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  20. क्या बात है .....
    mohabbat ho to aisi .....
    है कौन .....?

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  21. सर्वे भवन्तु सुखिनः ....भारतीय दर्शन को समर्पित आपकी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

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  22. वाह ... क्या खूबसूरत ख्याल है ... बहुत खूब सुनील जी ...

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