शुक्रवार, नवंबर 26, 2010

शहीद का घर

आज सारा भारतवर्ष २६/११ के शहीदों को अपने अपने अंदाज
में श्रद्धांजलि  दे रहा है | कुछ साईकिल चला कर , कुछ मोमबत्ती
जला कर ओर कुछ शांति मार्च निकाल कर | अब प्रश्न  उठता है
इनमें से कितने लोग इन्हें कल याद रखेंगे इसका उत्तर  मै आप पर
छोड़ता हूँ |क्या आपने कभी यह सोचा  जिस परिवार का कोई
व्यक्ति शहीद  होता है उस घर का क्या हाल होता है |
मै इस रचना के माध्यम से आपको एक शहीद के घर में लेके चलता हूँ |


बेटे के जब मौत का संदेशा घर में आया था |
तब बूढी माँ के आँखों में तो सागर उतर आया था |

कंधे पर खिलाया था जिसने अपने लाल को ,
अर्थी का तो  वोझ भी उसी कंधें ने उठाया था |

अभी सुहाग कि सेज के तो फूल मुरझाये नहीं ,
 और चूड़ियों  के टूटने का समय वहाँ आया था | 

भाई ओर बहन के करुण क्रंदन को देख कर ,
अपने किये पे  तो काल भी पछताया था |


47 टिप्‍पणियां:

  1. पहले शेर में मां दूसरे में पिता तीसरे में पत्नि और चौथ्ेामें भाई बहिन । आपने सही प्रश्न उठाया है कि इन्हे कितने लोग कल याद रखेंगे ? लेकिन सुनील जी वक्त का मरहम धीरे धीरे घाव भरदेता है वाकी जो बातें आपने लिखी है वे वाकई एक विचारणीय प्रश्न उत्पन्न करती है

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  2. इतनी दुख भरी कविता , मन भर आया , जीवन की कडवी सच्चाई से वाकिफ करा दिया आपने

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. दिल को छूने वाली, बेहद मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  5. 4/10

    बहुत ही भावपूर्ण रचना-सार
    एक सैनिक सब कुछ भूलकर/त्यागकर अपने कर्त्तव्य-पथ पर शहीद हो जाता है. उसका त्याग देशवासियों पर कर्ज की मानिंद है.

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  6. हर पंक्ति भावपूर्ण है..... सच शहीदों के परिवार के लोगों का तो जीवन ही बदल जाता है..... इन वीर सपूतों को नमन ...आभार इस हृदयस्पर्शी रचना के लिए....

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  7. शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि !

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  8. जिस तन लागे वो तन जाने। मार्मिक अभिव्यक्ति। शहीदों को नमन।

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  9. poora desh aur aanewali peedhiyan amar shahidon ki rini rahengi.
    koti-koti naman....
    ashrupoorit hriday se shraddhanjali...
    amar shahidon ke naam !

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  10. बेटे के जब मौत का संदेशा घर में आया था |
    तब बूढी माँ के आँखों में तो सागर उतर आया था |


    कंधे पर खिलाया था जिसने अपने लाल को ,
    अर्थी का तो वोझ भी उसी कंधें ने उठाया था

    bahut सुन्दर ,क्या करे कभी कभार तो लगता है की शायद इस देश की रक्षा के लिए बलिदान का संकल्प सिर्फ कुछ ही परिवारों ने लिया रहता है ! बाकी तो हरामखोर लूटने पर लगे है देश को !

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  11. कंधे पर खिलाया था जिसने अपने लाल को ,
    अर्थी का तो वोझ भी उसी कंधें ने उठाया था |
    ... bhaavpoorn va maarmik abhivyakti !!!

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  12. bahut hi maarmik ...// we will respect the father.mother of our freedom fighters...
    thanks to u for visiting my blog....

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  13. परिवार के दर्द और गर्व में अंतर करना कठिन हो जाता है.

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  14. मार्मिक !
    फोटो छोटी करें ! पेज लोड होने में बहुत समय लगता है !

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  15. सुनील जी ....आपकी ये पंक्तियाँ दिल को छू गई. मेरी भावनाएँ भी शहीदों के परिजनों के साथ हैं.

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  16. सुनील जी बहुत ही भावपूर्ण मन को छूने वाली कविता ।

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  17. मैंने ये मंज़र देखा था... आपकी इस कविता न सबकुछ आँखों के सामने ले आ दिया...

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  18. भावपूर्ण हृदयस्पर्शी रचना

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  19. ek bahut hi marm-sparshi rachna .dil bhar aaya.
    aapka prashn bilkul sateek hai.log aapni-apni tarah se shaheedo ko shrddhanjali arpit karte hain,par jin par gujari vo kya karen.
    bahut hi samvedan sheel post.
    poonam

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  20. मार्मिक...हृदय को उद्वेलित करने वाली रचना।...मन द्रवित हो गया।

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  21. मन अशांत हो उठा है. मौन ही रहूंगी

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  22. भावपूर्ण रचना लिखा है आपने ! दिल को छू गयी!

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  23. भावमय करते हुये शब्‍द ...बहुत ही मार्मिक अभिव्‍यक्ति ।

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  24. मार्मिक अभिव्यक्ति ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  25. sach kaha aapne kal kaun yaad rakhega shaheedon ko .ek shaheed kisi maa ka beta ,kisi baap ke budape ki laathhi ,kisi ki mang ka sindoor ,kisi bhai bahan ka dil ka tukda hota hai .sara parivar bikhar kar rah jata hai .bahut hi man ko hila dene vali abhivyakti hai aapki rachna .shayad ek kavi ka kartavy bhi yahi hai ki vo samaj ke samaksh aisi baat rakhe jo use aaina dikha sake .

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  26. यही तो दुर्भाग्य है की जहाँ हम शहीदों को बहुत जल्द भूल जाते है वहीं हम हीरो- हिरोइन और घूसखोर नेताओं को सर पे बिठा कर रखते है. शहीदों के लिए बने आदर्श सोसाइटी को भी हमारे नेता लोग आपस में बन्दर -बाट कर लेते है.बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति. शहीदों को नमन.

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  27. मार्मिक अभिव्यक्ति !
    देश के शहीदों को नमन !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  28. मार्मिक और भावपूर्ण प्रस्तुति..आभार

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  29. दिल को छूने वाली, बेहद मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति. आभार.
    धन्यवाद ............

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  30. सुनील जी,
    नमस्ते!
    १. मार्मिक रचना.
    २. भूल जायेंगे.
    आशीष
    --
    नौकरी इज़ नौकरी!

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  31. आशीष जी नमस्कार
    १ धन्यवाद
    २ सही जवाब

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  32. सुनील जी आपके बारे में , आपके विचार पढ कर अच्छा लगा । स्वार्थ से परे , देश के लिये अपने कर्तव्य के लिये मर-मिटने वालों के लिये जो लिखा है प्रेरक है । सच तो यह है कि उन जांबाज शहीदों के केवल गीत गाना ही नही ,उनके जज्बात को अपने जीवन में उतार लेना भी आवश्यक है । उनके प्रति यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।

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  33. thanks for coming on my blog....

    aapki rachna shaandar hai...
    sab log kal shahido ko bhool jate hain..

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  34. शिद्दत से महसूस किया है आपने और उसी तरह महसूस कराया भी है.

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