सोमवार, नवंबर 01, 2010

हास्य कवितायेँ ,दीवाली की फुलझड़ी



जलते हुए मकान से
जिन  लोगों ने दस आदमियों को निकाला
वह तो बस दो हिम्मत वाले  थे 
मग़र दोनों को जेल हो गयी .
क्योंकि मकान के अन्दर तो फायर ब्रिगेड वाले थे |


              




एक मिठाई की दुकान पर लिखा था |
शुद्ध देशी घी से बनी मिठाई की दुकान 
और नकली सिद्ध करने वाले को 
एक हज़ार रुपये नकद इनाम |
बोर्ड के नीचे लिखा था ,
हम अपना वादा बहुत ईमानदारी से निभाते है |
और यह इनाम एक साल में दो बार दे जाते है |
                     





 एक  छोटी चाय की दुकान पर लिखा  था |
होटल ओवेराय  शेरेटन यही है 
और नीचे लिखा था 
हमारी दूसरी कोई ब्राँच नहीं है |

18 टिप्‍पणियां:

  1. हंसी-हंसी में बहुत गंभीर बात कह गए हैं।
    हम अपना वादा बहुत ईमानदारी से निभाते है |
    और यह इनाम एक साल में दो बार दे जाते है |

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  2. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 02-11-2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

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  3. 3.5/10

    बहुत ही सुनी-सुनाई सी / सामान्य पोस्ट
    नयापन न होने के कारण हंसाने में सफल नहीं है रचनाएं

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  4. वाह वाह,
    कटाक्ष भी, ठहाके भी

    दिपावली की हृादिक शुभकामनाये।

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  5. ustaad ji ne sahi kaha...lekin fir bhi aapke andaaz mein mujhe taazgi lagi aur hansi bhi aayi..shayad ustaadji rating ke chasme se sabko dekhte hain isliye hansi nahi aayi ho...jeevan mein itni bhi gambhirta achchi nahi hoti... diwali mubarak ho..aise hi hansate rahiye... shukriya..

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  6. मिठाई का दुकानदार ईमानदार है

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  7. हा हा हा ! ये तो वास्तव में ही बहुत खूबसूरत फूलझड़ियाँ निकली ।
    बहुत सुन्दर ।

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  8. वाह सहाय जी, बरेली का नाम रोशन कर रहे हैं..

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  9. हा हा हा!
    स्वादिष्ट!
    आशीष
    ---
    पहला ख़ुमार और फिर उतरा बुखार!

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  10. बहुत बढ़िया लिखा..वाह! मजा आ गया.

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  11. बहुत बढ़िया कटाक्ष....हंसी-हंसी में बहुत गंभीर बात कह गए....

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  12. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है!
    राजभाषा हिन्दी पर – कविता में बिम्ब!

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  13. ha ha ha ye achi rahi............apkobhi diwali ki shubh kamnaye.........

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