शुक्रवार, अगस्त 03, 2012

मतला और एक शेर,.......



जब दवा बेअसर हो जाती है तब दुआओं का असर होता हैं |
सताना गरीब को छोड़ो , बददुआओं  का भी असर होता हैं| 

और ग़र आ रही हो, ज़िल्लत की महक किसी रोटी से ,
मत भूलो मेरे दोस्त उसका एक निबाला भी ज़हर होता हैं ।

15 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ,,, क्या बात है बेहतरीन प्रस्तुति,,,,सुनील जी,,

    RECENT POST काव्यान्जलि ...: रक्षा का बंधन,,,,

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  2. सही कहा है आशीर्वाद भी फलते हैं और शाप भी..अपमान का एक घूंट भी जहर से बढ़कर होता हो..जिंदगी की सच्चाई !

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  3. वाह ... बेहतरीन भाव
    आभार आपका

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  4. बहुत सुन्दर और सार्थक सृजन, बधाई.

    कृपया मेरी नवीनतम पोस्ट पर पधारें , अपनी प्रतिक्रिया दें , आभारी होऊंगा .

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  5. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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