रविवार, जुलाई 22, 2012

किसकी चली ?


ना हिन्दू की चली ना मुस्लिम की चली ,
तभी तो रमजान में राम और दीवाली में अली ।
किसकी चली ?

 मजहबी दंगे में मेरे  शहर में दो  लाशें   मिली,
 एक लाश  दफ़न हुई और दूसरी जली।
 किसकी चली ?

बना तो दीं  एक सी, मगर तासीर अलग अलग ,
एक नमक का गर्रा तो दूसरी मिश्री की डली ।
किसकी चली ?    

29 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर भाव.....
    मन खुश हो गया..
    सादर
    अनु

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  2. अंत में एक तो अधिक हो गया लगता है। बना तो दीं एक सी...

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  3. गलती को सुधार लिया गया हैं |धन्यवाद.......

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  4. ईर्ष्या और द्वेष की कहाँ चलती है?

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  5. ना हिन्दू की चली ना मुस्लिम की चली ,
    तभी तो रमजान में राम और दीवाली में अली ।

    क्या बात है ....
    यही तो खूबी है इस देश की ....!!

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  6. वाह ... अनुपम भाव लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

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  7. चली किसी कि नहीं बस कुछ स्वार्थियों कि रोटी सिकी

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  8. @ बहुत ही सारगर्भित काव्य... ऐसे काव्य बहुत कम लिखे जाते हैं.

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  9. ना किसन की चली ना राम की चली,
    तभी तो हाथ से 'हा' और साईकिल से 'किल' निकली.*
    किसकी चली ?

    राष्ट्रपति चुनाव में चापलूसी की रेवड़ी मिली,
    एक रेवड़ी 'रसगुल्ला' हुई और दूसरी घुली.
    किसकी चली ?

    क़ानून तो है एक ही, मगर असर अलग-अलग,
    एक जुर्म को जेल तो दूसरे को छूट है खुली.
    किसकी चली ?
    ___________________
    [*हा! और 'किल' से सताया जाना और अपराध का अर्थ निकालने की कोशिश की है.
    ** किसन = अन्ना हजारे, राम = बाबा रामदेव.]

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  10. बहुत ही सुंदर ..
    सोचने को प्रेरित करती ..

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  11. bahut sunder bhav........kalyug mein to na hi ram aur na hi rahim ki chali.......

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  12. किसी की नहीं...सिर्फ सच्चे भाव की चली|
    सुंदर रचना !!

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  13. aam insan ki na chali na chalegi. lekin kisi ko to fir bhi chali kuchh aur waqt ke liye kisi ki kursi thami.

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  14. सुंदर रचना...............उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

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  15. बहुत बढ़िया रचना है एकता का सार्थक सन्देश देती हुई ,विभेद को पाटती हुई .

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  16. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति सच को दर्शाती ..न किसी की कभी चली और न चलेगी ही ..खून का कतरा एक है काश समझ में आये स्नेह बरसे ..मानवता स्नेह से नहाए
    भ्रमर ५

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  17. बहुत बढ़िया सार्थक प्रस्तुती, सुंदर रचना,,,,,

    RECENT POST काव्यान्जलि ...: आदर्शवादी नेता,

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  18. "बना तो दीं एक सी, मगर तासीर अलग अलग ,
    एक नमक का गर्रा तो दूसरी मिश्री की डली,
    किसकी चली ? "

    सुंदर,सार्थक भाव.

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  19. बहुत सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति...

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  20. न इनकी चले न उनकी चले ,
    मोहब्बत की गली में मोहब्बत की चले |

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  21. gazab ki ar us par प्रतुल वशिष्ठ ji ka comment !! wah !!
    मजहबी दंगे में मेरे शहर में दो लाशें मिली,
    एक लाश दफ़न हुई और दूसरी जली।
    किसकी चली ?

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