रविवार, जुलाई 15, 2012

चंद शेर आपके लिए.......

मेरे शहर में एक गली हो ऐसी ,
जहाँ मुहब्बत ही पल रही हो ।
जहाँ फ़ज़र की नमाज भी हो .
और लौ आरती की भी जल रही हो ।

क से काशी और  क से काबा ,
म से मंदिर मस्जिद हैं ।
मुझे दिखा दो किताब ऐसी ,
जो मायने इनके बदल रही हो ।

चलो उखाड़ कर हम फेंकें ,
दहशत के उन पेंड़ों को ।
इधर साख हो  जिनकी फैली,
मगर उधर जड़ निकल रही हो ।


23 टिप्‍पणियां:

  1. चलो उखाड़ कर हम फेंकें ,
    दहशत के उन पेंड़ों को ।
    इधर साख हो जिनकी फैली,
    मगर उधर जड़ निकल रही हो ।
    adbhud likhe hain......

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  2. बहुत सुन्दर.....
    गहन अर्थ लिए हुए शेर.......

    सादर
    अनु

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  3. सब मिलजुल रहें, उसी में सबका भला है..

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  4. बहुत बढिया
    काश सब तक ये संदेश पहुंच जाए

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  5. मेरे शहर में एक गली हो ऐसी ,
    जहाँ मुहब्बत ही पल रही हो
    सुन्दर विचार... बेहतरीन प्रस्तुति

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  6. क से काशी और क से काबा ,
    म से मंदिर मस्जिद हैं ।
    मुझे दिखा दो किताब ऐसी ,
    जो मायने इनके बदल रही हो ।

    वाह,,,, बहुत ही सुंदर शेर ,,,,बधाई सुनील जी,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  7. क से काशी और क से काबा ,
    म से मंदिर मस्जिद हैं ।
    मुझे दिखा दो किताब ऐसी ,
    जो मायने इनके बदल रही हो ।

    वाह, बहुत खूब .. सुंदर
    साभार !!

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  8. क से काशी और क से काबा ,
    म से मंदिर मस्जिद हैं ।
    मुझे दिखा दो किताब ऐसी ,
    जो मायने इनके बदल रही हो ।
    Kya baat hai!

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  9. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रवृष्टि कल दिनांक 16-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-942 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  10. चलो उखाड़ कर हम फेंकें ,
    दहशत के उन पेंड़ों को ।
    इधर साख हो जिनकी फैली,
    मगर उधर जड़ निकल रही हो ।
    बहुत सुन्दर विचार
    बहुत बेहतरीन रचना:-)

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  11. जिनमें दिल की बात हो, सच्चे वो अशआर।
    सच्चे शेरों से सभी, करते प्यार अपार।।

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  12. मेरे शहर में एक गली हो ऐसी ,
    जहाँ मुहब्बत ही पल रही हो ।
    जहाँ फ़ज़र की नमाज भी हो .
    और लौ आरती की भी जल रही हो ।
    ़़़़़़़़़़़़़़
    बहुत अच्छी बात है कहाँ होता है
    लेकिन मेरे शहर में ये होता है ।

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  13. मेरे शहर में एक गली हो ऐसी ,
    जहाँ मुहब्बत ही पल रही हो ।
    जहाँ फ़ज़र की नमाज भी हो .
    और लौ आरती की भी जल रही हो ।
    वाह ... बहुत खूब ।

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  14. कल 18/07/2012 को आपके ब्‍लॉग की प्रथम पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.
    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' ख्वाब क्यों ???...कविताओं में जवाब तलाशता एक सवाल''

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  15. क से काशी और क से काबा ,
    म से मंदिर मस्जिद हैं ।
    मुझे दिखा दो किताब ऐसी ,
    जो मायने इनके बदल रही हो ।
    बहुत खूब!

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  16. उम्दा ख़्यालात की ग़ज़ल. बहुत ख़ूब.

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