शनिवार, फ़रवरी 04, 2012

मतला और एक शेर

वक्त के साथ में कभी कभी,
रिश्ते भी बदल जाते हैं ।
शोहरतें साथ हों अगर तो 
इन्सान भी बदल जाते हैं

यह बदलने का भी ना जाने
यह अजब दस्तूर है कैसा ,
मुसीबतों में देख कर मुझको ,  
अपने भी राह बदल जाते हैं ।


33 टिप्‍पणियां:

  1. कठिनाई में ही रिश्तों की पहचान होती है .. अच्छी प्रस्तुति

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  2. अपने-पराये की पहचान का एक वक्‍त ये भी आता है जिन्‍दगी में ।

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  3. सुन्दर अभिव्यक्ति,भावपूर्ण.

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  4. घर बना के अपना क्यों सजाते है लोग,
    यादों के सहारे क्यों जिए जाते है लोग
    तन में जब तक सांस है,सब यार दोस्त है
    म्रत्यु हुई तो दफनाकर भूल जाते है लोग,..

    सुंदर प्रस्तुती,आपकी रचना बहुत अच्छी लगी,...

    MY NEW POST ...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

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  5. जो मुश्किलों में साथ नहीं, वो अपना नहीं..

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  6. जो मुश्किलों में साथ नहीं, वो अपना नहीं...

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  7. लगता है आपने भी राह बदल दिया!!!!!! आखिर इतने दिन बाद :)

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  8. सच बात है...

    अच्छी रचना.
    सादर.

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  9. वक्त के साथ क्या नहीं बदलता. सुंदर प्रस्तुति.

    बधाई.

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  10. कडवी सच्‍चाई मौजूदा दौर की।
    बेहतरीन।

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  11. आज के दौर की सच्चाई बयां कराती है आपकी रचनाये
    बेहद उम्दा प्र्सतुतिकरण ..

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  12. वाह ... सचाई को बयान कर रहा है ये मुक्तक ... सच में अपने भी मुंह फेर लेते हैं ..

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  13. Vah bahut khoob ....bhai sach ko bahutkhoob nawaja...mere naye post pr apka swagat hai.

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  14. कुछ मामलों में बदलना ठीक है तो कई मामलों में बड़ा तकलीफदेह... इस सबके बावजूद बदलाव तो होते ही रहते हैं।

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  15. अपने परायों की पहचान भी कराता है 'वक्त'. सटीक अभिव्यक्ति.

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  16. बहुत सुन्दर और सार्थक सृजन, बधाई.

    कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" पर भी पधारकर अपना स्नेहाशीष प्रदान करें, आभारी होऊंगा.

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  17. bilkul sahi mushkil mein log saath hone ka daava karte hai per jab kaho ki humko aapki jaroorat hai help us fir chup jaate hai

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  18. दिल से निकली बातें हैं,
    लाजवाब !

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  19. जब सब कुछ बदल रहा है..तो लोग भी बदलेंगे...बहुत सुंदर पंक्तियाँ !

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  20. वाह!!!!!बहुत बेहतरीन रचना,लाजबाब प्रस्तुति,
    NEW POST....
    ...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...

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  21. वाह!!!!!बहुत बेहतरीन रचना,लाजबाब प्रस्तुति,

    NEW POST...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...

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  22. न तो धोखा देने में कुछ नया है,न धोखा खाने में। दोनों अचेतन मन की विडम्बना है।

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  23. बहुत ख़ूबसूरत एवं लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  24. मुसीबतों में देख कर मुझको ,
    अपने भी राह बदल जाते हैं.मुसीबतों के समय तो अपना साया भी साथ छोड देती है। बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  25. किसी बहाने अपनों की पहचान हो जाती है. सुंदर लिखा है.

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