मंगलवार, मार्च 27, 2012

शेर के साथ शरारत . ...

आज मै   आपके  सामने कुछ शेर ऐसे पेश कर रहा हूँ जिनके साथ शरारत की गयी है ।


जिनके हांथों मैंने दिया था फूल कभी ।
उन्हीं के हाँथ का पत्थर आज मेरी तलाश में हैं ।


बरसती हुई बरसातों में और टपकती हुई रातों में ।
अक्सर हम यह सोंचते हैं खटिया  कहाँ पे डाली जाये ।


देख हम तेरी जुल्फ़ के कितने चाहने वाले हैं ।
तभी तो तेरे  दो चार गेसू , हर निवाले में हैं ।





30 टिप्‍पणियां:

  1. शेर से अच्छी शरारत कर रहे हैं.ओह.

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  2. देख हम तेरी जुल्फ़ के कितने चाहने वाले हैं ।
    तभी तो तेरे दो चार गेसू , हर निवाले में हैं । हा......हा......हा....
    कभी-कभी शरारतें भी अच्छी लगती हैं जैसे की उपरोक्त शेरों के साथ की गई है....
    मजेदार प्रस्तुति..........

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  3. :-)
    बहुत बढ़िया सर.......

    बरसती हुई बरसातों में और टपकती हुई रातों में ।
    अक्सर हम यह सोंचते हैं खटिया कहाँ पे डाली जाये ।

    लाजवाब.
    सादर
    अनु.

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  4. शेरो के साथ ये शरारत अच्छा लगा.

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  5. वाह ... क्या बात है इस शरारत में भी ... मज़ा आ गया सुनील जी ...

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  6. जिनके हांथों मैंने दिया था फूल कभी ।
    उन्हीं के हाँथ का पत्थर आज मेरी तलाश में हैं ।

    बहुत खूब, अच्छे काम का यही सिला मिलता है अक्सर :)

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  7. हल्के-फुल्के क्षणों में,दोस्तों के बीच ज़रूर चलता है यह सब।

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  8. बहुत खूब! बहुत रोचक शरारत...

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  9. सुनील जी नमस्ते !
    आखरी वाला तो बहुत शरारत भरा है ... हा हा हा ...
    मेरे ब्लॉग पर पधारने और अपनी अमूल्य टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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  10. पहले वाला तो बहुत संजीदा शेर दिखा, बाद के दो शरारती:)

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  11. sher to sava sher nikhle .:) sharat acchi thi sher ki :) badhai aapko sunil ji

    blog par swagat hai aapka
    http://sapne-shashi.blogspot.com

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  12. बढ़िया प्रस्तुति ...
    दूसरा ज्यादा गहन है ...!!

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    1. सार्थक, सुन्दर सृजन, बधाई.

      कृपया मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नवीनतम प्रविष्टि पर भी पधारें.

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  13. जिनके हांथों मैंने दिया था फूल कभी ।
    उन्हीं के हाँथ का पत्थर आज मेरी तलाश में हैं ।sidhi n
    sacchi bat bina kisi lag lpet ke ....waah..

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  14. हा-हा-हा ...
    दो-चार गेसू हर निवाले में हैं।
    लाजवाब!

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  15. लाजवाब.. रचना के लिए ... बधाई स्वीकारें.

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  16. ha.. ha.. ha.. बड़ी कमाल की शरारत है शेरों के साथ. आखिरी शेर तो बेमिशाल है भई !

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  17. पहला तो चोट करता है बाकी में शरारत है।
    सुधार लीजिए..
    हाथ..हाथों

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  18. ha.. ha.. ha.. बड़ी कमाल की शरारत है...........इसका पिक्चर रूपांतरण मेरे ब्लॉग पर हो सकता है आपको पसंद आए

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