बुधवार, जनवरी 12, 2011

जीने की शर्त


क्यों लगा दिए ?
दुनिया ने अपनी शर्तों के पहिये ,
मेरी जीवन की गाड़ी में I
शर्तों का मानना भी जरुरी है
क्योंकि ज़िन्दा रहना मज़बूरी है I
काश ! यह दुनिया मैंने बनायी होती,
तो जीने की कोई नहीं ,
शर्त लगायी होती I
मैं इसे एक कश्ती का नाम देता
और समय के सागर में उतार देता I
उन निश्छल हवाओं के सहारे
जो इसे लगा देती किनारे I

42 टिप्‍पणियां:

  1. शर्तों और तर्कों में बँधा जीवन।

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  2. पर वहां भी होती शर्त हौसला के सहारे मिलेगे किनारे

    सुन्दर,,

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  3. शर्तों के बिना तो भगवान चलने नही देते।इसी लिये तो उसने बहुत कुछ अपने पास रखा है ताकि आदमी अपनी मर्जी न कर सके। सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई।

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  4. भाव पूर्ण कविता ,सुंदर रचना

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  5. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  6. बिलकुल ठीक कहा सुनील भाई .....
    शुभकामनायें !

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  7. कवि के मन की कल्पना को कभी बांध पायी है शर्तें ? सुंदर प्रस्तुति!

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  8. काश जिंदगी बिना शर्तों के जी सकते ! पर यह कहाँ संभव है.बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  9. बहुत खुब। क्या जिन्दा रहने की यही शर्त है यहॉ के सारे शर्तो को मानना पड़ेगा।बात है।

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  10. काश ये दुनिया मैने बनायीं होती
    तो जीने की कोई shart भी ना लगायी होती
    बहुत सुंदर रचना

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  11. कल्पना कर रहा हूँ, कैसा होता होगा शर्त विहीन जीवन! आदत जो पड़ गई है शर्तों के साथ जीने की!

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  12. काश ! यह दुनिया मैंने बनाई होती ,

    तो जीने की कोई नहीं, शर्त लगे होती !

    मैं इसे एक कश्ती का नाम देता ,

    और समय के सागर में उतर देता !

    काश ! बहुत सुन्दर भाव !

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  13. बिना शर्त का जीवन ......!!
    अच्छी कल्पना है -

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  14. जय श्री कृष्ण...आप बहुत अच्छा लिखतें हैं...वाकई.... आशा हैं आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा....!!

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  15. प्रभावी रचना ...... यही शर्तें बांधें रखती है ....

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  16. शर्तों में ही तो बंधा है ये जीवन!
    अच्छी भावाभिव्यक्ति है .

    -अल्पना वर्मा

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  17. बिना शर्त का जीवन , सुन्दर परिकल्पना . सुन्दर रचना .

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  18. sunil ji jivan ki kashti me sharton ki patavare lagi hai tabhi to kinare pahunchneka maja hai..........is baar ki rachna mujhe bahut sunder lagi.....

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  19. जीने की शर्त...
    शर्तों पे ज़िंदगी...
    बहुत बहिया रचना... एकदम सत्य को शब्द दे दिए आपने...
    मकर संक्रांति, लोहरी एवं पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  20. Sunil ji...Rachna bahut pasand aayi.

    Zindagi ke prati aapka nazaryia swagatyogay hai.

    Apko MAKAR SANKRANTI, PONGAL AUR LOHRI KI HARDHIK SHUBHKAAMNAYEN.

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  21. हर शब्द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुस्ति!
    लोहड़ी, पोंगल एवं मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  22. बहुत ही सुन्दर! बेहतरीन अभिव्यक्ति!

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  23. बस ये काश ही तो रह जाता है साथ ......

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  24. दुनिया रचने की कल्पना अद्भुत है।
    काश, ऐसा हो सकता कि हम अपनी दुनिया ख़ुद बनाते।
    एक अच्छी कविता का सृजन करने के लिए बधाई।

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  25. बहुत ही प्रभावशाली रचना
    उत्कृष्ट लेखन का नमूना
    लेखन के आकाश में आपकी एक अनोखी पहचान है ..

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  26. सराहनीय प्रस्तुति . अब तो शर्त बिना का जीवन भी काटने को दौड़ेगा. आदत जो पड़ गयी है

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  27. जीवन की यही पहेली
    शर्त है उसकी सहेली

    अतीव सुन्दर रचना एवं आपकी बच्चो की अति सुन्दर कृति .
    आपसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.

    - अमन अग्रवाल "मारवाड़ी"
    amanagarwalmarwari.blogspot.com

    marwarikavya.blogspot.com

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  28. SUNDAR BHAAV SAJAAYE HAIN ... PAR YE JEEVAN KADAM KADAM PAR SHARTON SE BHARA HAI ...

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