शनिवार, सितंबर 11, 2010

हिंदी सप्ताह के उपलक्ष्य में राजभाषा को समर्पित एक कविता


हिंदी एक पुष्प


 



रंग बिरंगे फूल खिले है 
भाषा के इस उपवन में |
सबकी अपनी सुगंध बसी है
हर मानस के मन में |
मग़र इस उपवन की शोभा को
बस एक ही पुष्प बढ़ाता
नाम पड़ा है हिंदी जिसका
और जो सबको महकता |
अपने रस की कुछ बूंदों को
जब इसने कविता में डाला
अमर हो गए कवि देश के
पन्त प्रसाद और निराला |

  
 


जिसके मन में बसी यह भाषा
या जो इसको अपनाता |
नहीं ज़रूरत किसी प्रमाण की
वह सच्चा देश भक्त कहलाता |

16 टिप्‍पणियां:

  1. आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की शुभकामनायें ! भगवान श्री गणेश आपको एवं आपके परिवार को सुख-स्मृद्धि प्रदान करें !
    बहुत सुन्दर!

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  2. बहुत अच्छी और प्रेरक पंक्तियां, वरना अजकल तो फ़ैशन सा हो गया है हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में राजभाषा की बुराई करना।

    बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    देसिल बयना – 3"जिसका काम उसी को साजे ! कोई और करे तो डंडा बाजे !!", राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

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  3. भाई सुनिल कुमार जी
    राजभाषा’हिंदी’को सपर्पित इस कविता में,आपने अपने ही नहीं,मेरे भी दिल की बात कही हॆ.’राजभाषा विकास मंच’के नाम से मेरा एक ब्लाग हॆ.आप जॆसे स्नेही जनों का वहां पर भी स्वागत हॆ.आपकी इस कविता को आपके नाम के उल्लेख के साथ-अपने उक्त ब्लाग पर भी प्रकाशित करना चाहता हूं-यदि आपकी अनुमति मिल जाये.

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  4. सही परिभाषा दी है आपने देश भक्त की। सच्चा देश भक्त वही है जो अपनी मातृभाषा के प्रति समर्पित हो। और हिन्दी हमारी मातृभाषा ही नही राष्ट्रभाषा है। देश प्रेम को उजागर करती सुन्दर कविता ।

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  5. meri najar me bhasha yekdusre se communicate karne ka sunder sadhan hai sabhi bhashaye sunder hai. kisi yek ka agrha kyon?

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  6. जो अपनी मात्र भाषा को महत्व देता है ,उसपर गर्व करता है उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती |राष्ट्र भाषा में लेखन के लिए बधाई | अच्छी रचना के लिए एक बार पुनः बधाई|
    आशा

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  7. गलती से राष्ट्रभाषा के स्थान पर मात्रभाषा लिखा गया है क्षमा चाहती हूं |
    आशा

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  8. apne bhasha ki ijjat krne se mhan kary koi nhi kyon ki isi madhym se hum smaj ko our smaj hmko jan our smjh pata hai .
    bhut sunder rchna .

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  9. "जिसके मन में बसी यह भाषा
    या जो इसको अपनाता |
    नहीं ज़रूरत किसी प्रमाण की
    वह सच्चा देश भक्त कहलाता"

    आभार

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  10. बहुत सुन्दर रचना है.......हिंदी में, हिंदी के लिए, हिंदुस्तान के लिए ... हम सब के लिए .. धन्यवाद !!

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  11. बहुत अच्छी पंक्तियां...
    राजभाषा’हिंदी’को सपर्पित सुंदर भाव......!!!!

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  12. राजभाषा का हम सब लोग पूरा सहयोग करके सही जगह दिला सकते

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