सोमवार, अगस्त 30, 2010

तहजीब


तहजीब तो हमारे
पुरखों की शान होती है |
इसको संभालने में
हमारी उम्र तमाम होती है |

बेहयाई को फैशन का
जामा पहनाने वालों
मत भूलो ,तुम्हारे घर में भी
एक बेटी जवान रहती है |

14 टिप्‍पणियां:

  1. बेहयाई को फैशन का
    जामा पहनाने वालों
    मत भूलो ,तुम्हारे घर में भी
    एक बेटी जवान रहती है |

    ....सार्थक रचना...सशक्त प्रस्तुति...बधाई.
    __________________
    'शब्द सृजन की ओर' में 'साहित्य की अनुपम दीप शिखा : अमृता प्रीतम" (आज जन्म-तिथि पर)

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह! बहुत सुन्दरता से आपने सच्चाई को शब्दों में बखूबी पिरोया है! बहुत खूब!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहयाई को फैशन का
    जामा पहनाने वालों
    मत भूलो ,तुम्हारे घर में भी
    एक बेटी जवान रहती है |
    rk katu sachchaaii, ati sundar

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपकी टिप्पणी के जरिये ब्लॉग तक आया। समझ में नहीं आता लेआउट को सराहूँ या रचनाओं को। दोनों ही अद्भुत। आपका सौन्दर्य बोध मन को भीतर तक छू जाता है। हार्दिक अभिनन्दन !

    उत्तर देंहटाएं
  5. सशक्त एवं सार्थक सन्देश!
    --
    अब मैं ट्विटर पे भी!
    https://twitter.com/professorashish

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपको एवं आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेहयाई को फैशन का
    जामा पहनाने वालों
    मत भूलो ,तुम्हारे घर में भी
    एक बेटी जवान रहती है |

    बहुत सटीक और सुंदर प्रस्तुति...

    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की मुबारकबाद एक शेर के मध्यम से

    "है योमे अष्टमी दिल पर खुशी सी छाई है
    किशन के जन्म की सब को बहुत बधाई है"

    उत्तर देंहटाएं
  8. kavya srijan behtareen....par sunil ji ..main aapse sahmat nahi iss masale par !!

    उत्तर देंहटाएं