रविवार, अगस्त 01, 2010

"फ्रेंडशिप डे " पर एक दोस्त का दर्द



ना जाने किस तरह के  लव्ज
मेरी जुवां से फ़िसल गए |
जो सदियों से दिल में रहते थे
वह पल में निकल गए |
हालाँकि कि मुझको उनसे
कोई शिकवा गिला नहीं |
मग़र परेशां ज़रुर हूँ ,
क्या दोस्ती के मायने बदल गए |

23 टिप्‍पणियां:

  1. सच में मायने बदल गये सम्बन्धों के।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर रचना है!
    --
    मित्रता दिवस पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. bas eak para me pure zindgi ki hakikat! bahut umda rachna!

    उत्तर देंहटाएं
  4. आज स्वार्थ हर रिश्ते पर हावी होने की कोशिश में है , बेहतरीन !

    उत्तर देंहटाएं
  5. वक्त ने सब रिश्तों के मायने बदल दिए हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  6. नए जमाने के हंसों ने चुग डाले रिश्तों के मोती.

    उत्तर देंहटाएं
  7. सच में आज दोस्ती के मायने बदल गए हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  8. Friendship Day पर तो आपने बहुत सुन्दर कविता लिखी ...बधाई. 'पाखी की दुनिया' में भी घूमने आइयेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत संवेदनशील रचना .शायद इसी लिये कहा गया हॆ मोल तोल के बोल क्योकि शब्दो के बाण दिल की गहराईयो तक वार करते हॆ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

    उत्तर देंहटाएं
  11. क्या दोस्ती के मायने बदल गए |

    बहुत सही सवाल किया है ।
    विचारणीय विषय ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. सार्थक प्रस्तुति- साधुवाद!
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

    उत्तर देंहटाएं
  13. "माफ़ी"--बहुत दिनों से आपकी पोस्ट न पढ पाने के लिए ...

    उत्तर देंहटाएं
  14. SUNIL JI MERE BLOG PAR ZAROOR PADHE...

    करते है साक्षर ही अधिक भ्रूण हत्या ...............!

    उत्तर देंहटाएं
  15. पहली बार आपका ब्लॉग देखा। जितना सुन्दर रूपांकन है उतना ही सशक्त शब्दांकन । बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  16. today i had seen a comment from your side on my poem, aapka blog padane ki jigyasa hui, "dosi ka dard" padi . kitne sachchhi hai aur kitna chinat ka vishay bhi
    ene sundar bhav wyak kane k liy apko bahut bahu badai

    उत्तर देंहटाएं