मंगलवार, अप्रैल 10, 2012

आदत........(मतला और एक शेर)


 किसी की मौत पर बहाने के लिए,
 दो आंसू कहाँ से लाऊं मैं। 
 मुझको तो आंसूओं को पीने की ,
 आदत जो पड़ गयी हैं ।


 आजकल मेरी मुस्कराहटें भी,
 मुझसे नाराज़ होने लग गयीं ।
 मुझे तो ग़म में भी मुस्कराने की,
 आदत जो पड़ गयी हैं । 



29 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...............

    क्या कहने!!!

    सादर.

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  2. आजकल मेरी मुस्कराहटें भी,
    मुझसे नाराज़ होने लग गयीं ।
    मुझे तो ग़म में भी मुस्कराने की,
    आदत जो पड़ गयी हैं ।

    मुस्कराहट अब इतनी आसान नहीं रही. बहुत सुंदर शेर.

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  3. वाह!!!!!!!बेहतरीन शेर,सुनील कुमार जी,...
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,लाजबाब प्रस्तुति,....

    RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

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  4. किसी की मौत पर बहाने के लिए,
    दो आंसू कहाँ से लाऊं मैं।

    dil ko chhoo liya.

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  5. अच्छी रचना है, भावपूर्ण अभिव्यक्ति....समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

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  6. विपरीत हालातों में भी मन को सम्हालती सुंदर रचना ...
    शुभकामनायें ....

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  7. वाह !!!!! शानदार शेर, एक पुराना गीत याद दिला गया
    मैं अश्कों में सारे जहाँ को डुबो दूँ
    मगर मुझको रोने की आदत नहीं.

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  8. मुस्कराहटों को भी गम सहना सिखायेंगे तो विद्रोह कर बैठेंगी।

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  9. वाह:.. सुनील जी,लाजबाब प्रस्तुति,..

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  10. ग़मी के ऊपर मुस्कराहट बिछाएँगे तो खुशी के साथ खड़ी मुस्कराहट को बुरा लगेगा ही. सुंदर लिखा है.

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  11. मुस्कुराहट नाराज भी होती हो तो होने दें....देर सबेर मान ही जायेगी, मुस्कुराहट जो ठहरी...

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  12. सुनील जी बहुत सुन्दर ऐसी आदतें सब को पड जाएँ तो क्या कहना --खूबसूरत भाव ..जय श्री राधे
    भ्रमर ५

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  13. मुझे तो ग़म में भी मुस्कराने की,
    आदत जो पड़ गयी हैं ...

    अच्छी आदतें हैं !
    शुभकामनायें भाई ...

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  14. "आजकल मेरी मुस्कराहटें भी,
    मुझसे नाराज़ होने लग गयीं ।
    मुझे तो ग़म में भी मुस्कराने की,
    आदत जो पड़ गयी हैं । "

    वाह !

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  15. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  16. गम में भी मुस्कुराना, यह बहुत मुश्किल होता है,,,,,
    बहुत सुन्दर....
    सादर

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  17. आदतें जैसी भी हों, वे ही हमारे दुख-सुख के विश्वसनीय साथी होते हैं।

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  18. किसी की मौत पर बहाने के लिए,
    दो आंसू कहाँ से लाऊं मैं।
    मुझको तो आंसूओं को पीने की ,
    आदत जो पड़ गयी हैं । ......बहुत गहन !!!

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  19. आजकल मेरी मुस्कराहटें भी,
    मुझसे नाराज़ होने लग गयीं ।
    मुझे तो ग़म में भी मुस्कराने की,
    आदत जो पड़ गयी हैं ।

    वाह!!!!! क्या बात है ...सुनील जी
    बहुत सुंदर रचना...बेहतरीन पोस्ट
    .
    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

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  20. गम में भी मुस्कुराना आता है तो नाराजगी कैसी ...

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  21. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति....

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