शनिवार, अप्रैल 09, 2011

सूखा वृक्ष



हरे भरे 
घने झुरमुटों के बीच                                   
गर्व से झांकता ,
एक सूखा वृक्ष   |
जो अपनों से , 
केवल तिरस्कार ही पाता है |
 फिर भी उसके  अस्तिव को
कोई नहीं नकार पाता है |
आंधियों के हर झोके 
को जो हँस सहता |
गिरने का भय ,
जिसके मन में ना रहता |
क्योंकि ?
ना तो वह किसी पाप 
की धरती पर,
लगाया गया था|
और ना ही ,
किसी के खून से 
सींचा गया था |  

52 टिप्‍पणियां:

  1. गहन अभिव्यक्ति ...ऐसा लगता है जैसे किसी स्वयं निर्मित इंसान के लिए लिखा गया हो ...

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  2. अपनी शक्ति से जीवित वह सूखा वृक्ष।

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  3. हरे भरे घने झुरमुटों के बीच गर्व से झांकता ,
    एक सूखा बृक्ष |
    जो अपनों से ,
    केवल तिरस्कार ही पाता है |
    फिर भी उसके अस्तिव को कोई नहीं नकार पाता है |

    संवेदनाओं से भरी बहुत सुन्दर कविता...

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  4. अच्‍छी भावाभिव्‍यक्ति।
    शुभकामनाएं आपको

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  5. aadarniy sunil bahai ji
    aapki kavita padh kar dil se bas yahi shabd nikala
    Wah---
    bahut hi behatreen abhivykti
    bahut abhut badhai
    poonam

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  6. बेहद शानदार लगी यह कविता। इसमे जो कटाक्ष है वह भीतर तक चुभते हैं।
    ..बहुत बधाई।

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  7. बेहद तीखा प्रहार करती हुयी रचना.

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  8. Vimbon aur prateekon ke maadhyam se kahi gayi ek kalatmak post jo kathy ko gahraai se abhivyakt karme me saksham. Thanka for such type article.

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  9. कुछ महान इंसानों की भी यही कहानी है।

    जीवन सागर का गहन मंथन किया है आपने।

    शुभकामनाएं।

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  10. सुंदर भाव , सुंदर विचार को सुंदर शब्दों में पिरो दिया है आपने . आभार.

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  11. Behad sundar post...stya yahi hai...umr se kaya kamjor padti hai anuvaw nahi ...aur anuvaw ki mahtta kabhi kam nahi hoti...kabhi nahi.

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  12. गूढ़ भावों को शब्दों में सुन्दरता से पिरोया है......अच्छी लगी आपकी रचना।

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  13. सुखा है फिर भी आंधियों में सर उठाये खड़ा है कमाल है ... बेहतरीन एक अच्छा कटाक्ष .......

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  14. vriksh to hamari jaroort hai isliye uske astitav ko nakarna apna nuksaan karna hai ,magar uski sehat ka khyaal humthik se nahi kar paate .ati sundar .

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  15. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (11-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  16. वृक्षों की महिमा और उनके मानवीकरण पर बधाई, लिखते रहें.

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  17. वृक्ष ही नहीं वे पथ प्रदर्शक भी होते हैं जो ऐसे होते हैं !

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  18. ताउम्र का अनुभव जो होता है इनके पास ....

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  19. bahut saarthak vyanga....waastav me vriksha hi jeevan kaa aadar hai........aur sabse jyada bewafai aaj inhi ke saath ho rahi hai.........

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  20. बहुत ही बढ़िया .... कमाल के शब्द चुने हैं...... यथार्थपरक रचना

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  21. भाई सुनील जी बहुत सुंदर विचारों से सजी अच्छी कविता बधाई |

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  22. बहुत ही सुंदर विचारों से ओत प्रोत रचना मन को प्रभावित कर गयी। धन्यवाद।

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  23. सूखने के बाद भी ठठरी हड्डियां यूं ही खड़ी रहती हैं , बेजान फ़िर भी, तमाम आंधियां और तूफ़ान अपने में समटे लपेटे हुए ।

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  24. atal vishwas sa khada hai -sookha vriksh ....!!
    gahan bhaav se bhari sunder rachna ...!!

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  25. एक सूखा वृक्ष
    जो अपनों से
    केवल तिरस्कार ही पाता है!
    फिर भी उसके अस्तित्व को
    कोई नही नकार पाता है .....
    दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ सुनील जी , आभार !

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  26. गहन अनुभूतियों से भरी रचना... वह वृक्ष एक दिन फिर हरा होगा....

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  27. bahut sunder rachna ........
    sunil ji, kaya naraj hai hamse .....

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  28. बहुत गहन सोच..सुन्दर अहसासों से ओतप्रोत बहुत सुन्दर रचना..

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  29. Sukhe vriksh ka garv hame bhi sir uncha rakhanasikha raha hai... achchhi abhivykti..

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  30. सुनील जी ...बेहद उम्दा, गहरे भावों वाली कविता है. इसके लिए आपको बधाई.
    ब्लॉग जगत में पहली वर्षगाँठ पर आपको ढेरों शुभकामनाएँ ('देरी' के लिए माफ़ी चाता हूँ )

    साथ ही आपको राम नवमी की भी शुभकामनाएँ !

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  31. गहन भावमयी रचना लगी, विशेषकर गिरने का भय जिसके मन में न रहता...आभार.

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  32. आदरणीय सुनील जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    बहुत सुंदर रचना है ! बहुत भावपूर्ण !

    एक सूखा वृक्ष , जो अपनों से तिरस्कार ही पाता है …

    हमारे बुजुर्गों की यही तो स्थिति हो गई है …
    आपकी संवेदनाओं को प्रणाम !

    * श्रीरामनवमी की शुभकामनाएं ! *
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  33. पेड के ज़रिये बेहतरीन संदेश देती सुन्दर रचना.

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  34. ऐसे ही वृक्षों की जड़ों से धरती सुदृढ बनती है, बहुत सशक्‍त रचना।

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  35. वाह !
    बहुत ही भावपूर्ण , समर्थ ,सार्थक और सुन्दर प्रवाहमयी रचना ...

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  36. शायद अपनी शक्ति से सींचा गया वृ़ा हमेशा हरा भरा रहता है\ सुन्दर रचना। बधाई।

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  37. बहुत ही सुंदर और भावात्मक कविता है। बहुत-बहुत बधाई

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  38. बहुत सुंदर रचना .. किसी के आत्‍मविश्‍वास का कारण यह ही होता है !!

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