शुक्रवार, फ़रवरी 01, 2013

आज एक ताज़ा ग़ज़ल


ज़िन्दगी की कश्ती में हिम्मत की पतवार होना चाहिए ।
मोड़  सकते हैं हम तूफानों का रुख, दिल में यह एतवार होना चाहिए।

मेरी कश्ती तो टूटी थी जो मौजों में फंस कर डूब गयी ।
मेरे डूबने पर तूफानो  को नहीं नाज़  होना चाहिए ।

मेरी कश्ती दो चार हिचकोले खा गयी तो क्या हुआ ।
कश्तियों को भी अपने कमज़ोरी का, अहसास होना चाहिए ।

वह कश्तियाँ जो हवाओं  के सहारे ही किनारों से जा लगी ।
उनको अपनी किस्मत का एहसानमन्द    होना चाहिए ।

कागज  की कश्तियों  से  वह समुन्दर भी पार करले  ।
बस उस नाख़ुदा को, ख़ुदा पर एतवार  हों चाहिए ।


26 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूबसूरत गजल प्रेरणा देती हुई

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  2. बहुत लाजबाब प्रेरणात्मक गजल,,,,बधाई सुनील कुमार जी,,,

    RECENT POST शहीदों की याद में,

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  3. हिम्मत और विश्वास का भाव जगाती
    प्रेरणादायक गजल...
    बहुत ही लाजवाब....
    :-)

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  4. वह कश्तियाँ जो हवाओं के सहारे ही किनारों से जा लगी ।
    उनको अपनी किस्मत का अहसानमंद होना चाहिए ।

    ...बहुत प्रेरक और ख़ूबसूरत ग़ज़ल...

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  5. वह कश्तियाँ जो हवाओं के सहारे ही किनारों से जा लगी ।
    उनको अपनी किस्मत का अहसानमंद होना चाहिए ।

    बहुत खूब ... किस्मत साथ दे तो एहसानमंद जरूर होना चाहिए ...

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  6. विश्वास होगा तो पार हो जायेंगें

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  7. मेरी कश्ती दो चार हिचकोले खा गयी तो क्या हुआ ।
    कश्तियों को भी अपने कमज़ोरी का, अहसास होना चाहिए ।

    Bahut Umda....

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  8. कागज की कश्तियों से वह समुन्दर भी पार करले ।
    बस उस नाख़ुदा को, ख़ुदा पर एतवार हों चाहिए ।-----bahut sunder sarthak bhaw badhai

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  9. wahhh... Behtreen Rachna... Badhai...
    http://ehsaasmere.blogspot.in/2013/02/blog-post_11.html

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  10. मेरी कश्ती दो चार हिचकोले खा गयी तो क्या हुआ ।
    कश्तियों को भी अपने कमज़ोरी का, अहसास होना चाहिए ।

    बहुत सुंदर, सशक्त और प्रेरणात्मक अभिव्यक्ति...हार्दिक बधाई!!!
    ब्लाग पर माता-पिता की तस्वीरें देख अच्छा लगा....

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  11. मेरी कश्ती दो चार हिचकोले खा गयी तो क्या हुआ ।
    कश्तियों को भी अपने कमज़ोरी का, अहसास होना चाहिए ।

    यथार्थ को आत्मसात करती सुंदर रचना...

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  12. किश्ती मेरी दो चार बड़े, हिचकोले खायी, तो क्या है ।
    उसको भी अपनी कमजोरी कुछ याद तो रहनी ही चाहिए !


    शुभकामनायें सुनील जी !

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  13. मेरी कश्ती दो चार हिचकोले खा गयी तो क्या हुआ ।
    कश्तियों को भी अपने कमज़ोरी का, अहसास होना चाहिए ।

    ...वाह! बहुत उम्दा अहसास...सुन्दर ग़ज़ल..

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  14. कश्ती का नसीब ... कुछ अपने हाथ में..कुछ खुदा के....
    बहुत सुंदर रचना...!
    आभार!
    ~सादर!!!

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  15. मंगलवार 12/03/2013 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं .... !!
    आपके सुझावों का स्वागत है .... !!
    धन्यवाद .... !!

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  16. वाह ...सार्थक और सुंदर रचना .....
    आप भी पधारो स्वागत है ...
    http://pankajkrsah.blogspot.com

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  17. सादर जन सधारण सुचना आपके सहयोग की जरुरत
    साहित्य के नाम की लड़ाई (क्या आप हमारे साथ हैं )साहित्य के नाम की लड़ाई (क्या आप हमारे साथ हैं )

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  18. सुनील जी, 9 अप्रैल को हैदराबाद आने का प्‍लान बन रहा है। क्‍या आप अभी वहीं हैं। यदि हां, तो कृपया अपना नं0 मेल (zakirlko@gmail.com) करिएगा।

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