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गुरुवार, जून 09, 2011

आज कल के हालात पर चंद शेर


जमीं तो बाँट ली हमने अब आसमाँ की बारी है ,
संभल जाओ ए चाँद और सूरज अब खैर नहीं तुम्हारी है |

अँधेरे आजकल  बदनाम होने  से यूँ बच गए,
अब तो दिन दहाड़े ही गुनाहों का खेल जारी है |

अब तो  सरेआम लुट रहीं हैं अस्मतें बाज़ार में,
मगर अदालतों में वकीलों की गवाहों से ज़िरह जारी है |

 शहर में आजकल चोर डाकुओं का खौफ़ कुछ भी नहीं ,
 बस सफ़ेद टोपियों और खाकी वर्दियों का कहर जारी है |

उधर सरहद पर मर रहें है दो चार लोग रोज़ ,
इधर दोस्ताना माहौल में दोस्ती की बातचीत जारी है |

यह कैसी  बिसात बिछी है सियासत के मैदानों में ,
कि बाज़ी कोई भी जीते पर हार तो हमारी है |