जमीं तो बाँट ली हमने अब आसमाँ की बारी है ,
संभल जाओ ए चाँद और सूरज अब खैर नहीं तुम्हारी है |
अँधेरे आजकल बदनाम होने से यूँ बच गए,
अब तो दिन दहाड़े ही गुनाहों का खेल जारी है |
अब तो सरेआम लुट रहीं हैं अस्मतें बाज़ार में,
मगर अदालतों में वकीलों की गवाहों से ज़िरह जारी है |
शहर में आजकल चोर डाकुओं का खौफ़ कुछ भी नहीं ,
बस सफ़ेद टोपियों और खाकी वर्दियों का कहर जारी है |
उधर सरहद पर मर रहें है दो चार लोग रोज़ ,
इधर दोस्ताना माहौल में दोस्ती की बातचीत जारी है |
यह कैसी बिसात बिछी है सियासत के मैदानों में ,
कि बाज़ी कोई भी जीते पर हार तो हमारी है |