शनिवार, सितंबर 08, 2012

असहाय भगवान् ............

एक  बार जब भगवान् शंकर धरती भ्रमण करके लौटे तो उनका मन बहुत अशांत था ।
पार्वती  ने कहा जब आप धरती लोक से बापस आते थे तो बहुत प्रसन्न होते थे मगर इस 
बार ऐसा क्या हुआ कि आपका मन अशांत हैं । भगवान् शंकर ने कहा तुम तो जानती हो 
की मैं धरती पर लोगों को सुखी देखना चाहता हूँ लोगों का दुःख पूछता हूँ उनका निवारण 
करता हूँ । और उनको सुखी करके बापस आ जाता हूँ । मगर इस बार मैं अपने को बहुत 
असहाय अनुभव कर रहा हूँ । इस बार  एक व्यक्ति के दुःख को मैं दूर नहीं कर सका । 
क्योंकि उसका दुःख था कि  मेरा पड़ोसी सुखी क्यों हैं .............

25 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा इस बीमारी का इलाज भगवान शिव के पास भी नही है।
    तब इसे लाइलाज बीमारी घोषित कर कुछ वैक्सीन वगैरह की खोज करनी चाहिए..

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  2. वाकई यह लाइलाज बीमारी ही है...मगर आश्चर्य इस बात का है कि भगवान शिव को भी इस बात का पता बहुत देर से चला...जबकि यह रोग तो अब जड़ पकड़ चुका है।

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  3. ये तो लाइलाज बीमारी है,इसका तो इलाज कर ही नही सकता,,,,,

    बहुत बढ़िया बेहतरीन प्रस्तुति,,,,
    RECENT POST,तुम जो मुस्करा दो,

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  4. लाइलाज बीमारी है..
    इसका इलाज तो भगवान के पास भी नहीं है..
    :-)

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  5. बहुत सटीक सुनील भाई पडोसी की कमीज़ का उजलापन ही खा रहा है हिन्दुस्तान को ऊपर से कोयला भी खाने लगे अब लोग पहले तो चारे से ही पेट भर लेते थे .और बड़ी बे -शर्मी से कहतें हैं -मैया मोरी कसम तोरी मैं ने ही (नाहिं )कोयला खायो ......

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  6. बहुत बढ़िया बेहतरीन प्रस्तुति,वाकई यह लाइलाज बीमारी है.

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  7. :):) अक्सर लोग अपने दुख से कम दुखी होते हैं , दूसरों के सुख से ज्यादा दुखी होते हैं

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  8. ईर्ष्या का इलाज भगवान के पास भी नहीं है....
    बहुत बढ़िया कथा.

    सादर
    अनु

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  9. इसका इलाज किसी के भी पास नहीं ...
    सार्थक कहानी ...

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  10. और की खुशी दुख देने लगे तो भगवान ही मालिक है।

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  11. खूबसूरती से कहा गया एक सच ....इस बीमारी का इलाज तो किसी भी भगवान के पास नहीं हैं :)))

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  12. उफ्फ , दु:ख सकारण हो तो हल हो सकता है किंतु दु:ख अकारण हो तो भगवान के पास भी इसका इलाज नहीं है.बेहतरीन..

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  13. बढ़िया कथा श्रृंखला चल रही है

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  14. ऐसा सिर्फ़ एक व्यक्ति मिला ... मुझे तो लगता है भगवान को हरेक व्यक्ति ऐसा ही मिला होगा, तभी तो सब दुखी ही देखी नज़र आते हैं इन दिनों।

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  15. भगवान भी ईर्ष्या का इलाज न कर सका!
    घुघूतीबासूती

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  16. मन की बात बड़े साफगोई से कह डाली ... सादर मेरे भी ब्लॉग पर आये

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