गुरुवार, जनवरी 12, 2012

ग़ज़ल

चलो उस शख्स का एहतिराम कर लें ,
जो आंधियों में चिराग़ जलाने चला है |


ना कोई लावलश्कर ना कोई कारवां ,
बस अकेले ही ज़माने से लड़ने चला है |


मालूम है उसको शिकस्त ही मिलेगी ,
फिर भी वह किस्मत  आजमाने चला है |


समुन्दर भी उसकी हिम्मत पर हैरान हैं ,
जो रेत में अपना आशियाना बनाने चला हैं |
   

45 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति,बेहतरीन गजल मुझे अच्छी लगी,...
    welcome to new post --काव्यान्जलि--यह कदंम का पेड़--

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  2. समुन्दर भी उसकी हिम्मत पर हैरान हैं ,
    जो रेत में अपना आशियाना बनाने चला हैं |..
    hausla buland ho to kya nahi ho sakta

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  3. वाह ... बहुत खूब ..आज कल ऐसे लोग मिलते कहाँ हैं ?

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  4. समुन्दर भी उसकी हिम्मत पर हैरान हैं ,
    जो रेत में अपना आशियाना बनाने चला हैं ............quite motivating.

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  5. bahut khoob sir

    मालूम है उसको शिकस्त ही मिलेगी ,
    फिर भी वह किस्मत आजमाने चला है |

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  6. खूब-सूरत प्रस्तुति |
    बहुत-बहुत बधाई ||

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  7. मालूम है उसको शिकस्त ही मिलेगी ,
    फिर भी वह किस्मत आजमाने चला है |

    behad sundar..

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  8. ऐसे शख्स के लिए सफलता भी छोटी ही होती है। फिर,शिकस्त की तो बात ही क्या करें!

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  9. वाह!
    बहुत बढ़िया!
    लोहड़ी पर्व के साथ-साथ उत्तरायणी की भी बधाई और शुभकामनाएँ!

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  10. चलो उस शख्स का एहतिराम कर लें ,
    जो आंधियों में चिराग़ जलाने चला है |

    bahut sunder rachna. lohri avum makarsankranti ki shubhkamnayen.

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  11. ना कोई लावलश्कर ना कोई कारवां ,
    बस अकेले ही ज़माने से लड़ने चला है |बहुत बढ़िया.

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  12. आपके एहतराम के लिए धन्यवाद:) मैं वो चिराग हूं जो आंधियों से लड़ने चला हूं॥

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  13. वाह ,बहुत सुन्दर ..
    बहुत खूब ...

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  14. लोहडी और मकर संक्रांति की शुभकामनाएं.....


    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  15. शनिवार 14-1-12 को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  16. दिल से निकले ज़ज्बात हैं , ग़ज़ल !

    आभार

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  17. बहुत बढ़िया गजल लिखा है |शुभकामनाएं..

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  18. समुन्दर भी उसकी हिम्मत पर हैरान हैं ,
    जो रेत में अपना आशियाना बनाने चला हैं |
    ......
    आदरणीय सुनील जी काफ़ी दिन बाद आना हो पाया ब्लॉग पर क्षमा प्रार्थी हूँ..
    एक नायब गज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें !

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  19. मालूम है उसको शिकस्त ही मिलेगी ,
    फिर भी वह किस्मत आजमाने चला है |

    बहुत सुंदर गज़ल और शायद सच भी.

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  20. उर्दू शायरी की रवानगी पकड ली है ज़नाब ने काबिले तारीफ़ ग़ज़ल .

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  21. आपने बड़े ख़ूबसूरत ख़यालों से सजा कर एक निहायत उम्दा ग़ज़ल लिखी है।

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  22. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति, बधाई.

    पधारें मेरे ब्लॉग पर भी और अपने स्नेहाशीष से अभिसिंचित करें मेरी लेखनी को, आभारी होऊंगा /

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  23. समुन्दर भी उसकी हिम्मत पर हैरान हैं ,
    जो रेत में अपना आशियाना बनाने चला हैं |

    badhiya panktiyaan ....

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  24. ना कोई लावलश्कर ना कोई कारवां ,
    बस अकेले ही ज़माने से लड़ने चला है ...

    बहुत कम होते हैं ऐसे लोग ... संभाल के रखना चाहिए ... उम्दा शेर है सभी ..

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  25. साधारण तरीके से बड़ी बात कह गये आप इन चंद अशयार में।

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