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रविवार, सितंबर 14, 2014

हिंदी एक पुष्प

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में राजभाषा को समर्पित कविता



 


रंग बिरंगे फूल खिले है  
भाषा के इस उपवन में |
सबकी अपनी सुगंध बसी है
हर मानस के मन में |
मग़र इस उपवन की शोभा को
बस एक ही पुष्प बढ़ाता
नाम पड़ा है हिंदी जिसका 
और जो सबको महकाता  |
अपने रस की कुछ बूंदों को 
जब इसने कविता में डाला 
अमर हो गए कवि देश के 
पन्त प्रसाद और निराला |

  
 


जिसके मन में बसी यह भाषा 
या जो इसको अपनाता |
नहीं ज़रूरत किसी प्रमाण की 
वह सच्चा देश भक्त कहलाता |