मंगलवार, अगस्त 06, 2013

शहादत पर सियासत ...

आज सारा भारतवर्ष  शहीदों को अपने अपने अंदाज में श्रद्धांजलि  दे रहा है |  अब प्रश्न  उठता है इनमें से कितने लोग इन्हें कल याद रखेंगे इसका उत्तर  मै आप परछोड़ता हूँ |क्या आपने कभी यह सोचा  जिस परिवार का कोई व्यक्ति शहीद  होता है उस घर का क्या हाल होता है |
मै इस रचना के माध्यम से आपको एक शहीद के घर में लेके चलता हूँ |अगर इस रचना 
को पढ़ते समय आपके आँसू  निकले तो निकलने दीजिये मै  यह चाहता हूँ यह रचना आंसुओं के माध्यम से आप तक पहुंचे।     

बेटे के जब मौत का संदेशा घर में आया था |
तब बूढी माँ के आँखों में तो सागर उतर आया था |

कंधे पर खिलाया था जिसने अपने लाल को ,
अर्थी का तो  वोझ भी उसी कंधें ने उठाया था |

अभी सुहाग कि सेज के तो फूल मुरझाये नहीं ,
 और चूड़ियों  के टूटने का समय वहाँ आया था | 

भाई ओर बहन के करुण क्रंदन को देख कर ,
अपने किये पे  तो काल भी पछताया था |

9 टिप्‍पणियां:

  1. विनम्र श्रद्धांजलि

    हम तुम्हें मरने न देंगे,
    जब तक जिंदा कलम है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. दुर्भाग्यपूर्ण घटना, हम हतप्रभ हो कब तक बैठे रहेंगे?

    उत्तर देंहटाएं
  3. क्षोभ भरे दिल से शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर सामयिक दर्द भरी ग़ज़ल. मेरे ब्लॉग को भी फलो करे ख़ुशी होगी
    latest post: भ्रष्टाचार और अपराध पोषित भारत!!
    latest post,नेताजी कहीन है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रभावी रचना,,,,
    शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि ! ,,,

    RECENT POST : तस्वीर नही बदली

    उत्तर देंहटाएं
  6. मार्मिक चित्रण...उम्दा प्रस्तुति...शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि...

    उत्तर देंहटाएं